✍ प्रदीप राव कि खबर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े बड़े बदलाव की घोषणा हो गई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद
छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम 2025 लागू कर दिया गया है। नए प्रावधान के तहत अब 2200 वर्गफीट यानी 5 डिसमिल से कम कृषि भूमि की रजिस्ट्री नहीं होगी।
अवैध प्लॉटिंग पर लगेगी नकेल
सरकार का दावा है कि इस कानून से ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से फैल रही अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कालोनियों पर कड़ाई से रोक लगेगी। जमीन की छोटे-छोटे टुकड़ों में खरीद-फरोख्त के कारण किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा था और आए दिन सीमांकन विवाद खड़े हो जाते थे।
नया नियम सिर्फ गांवों में लागू
संशोधन अधिनियम के मुताबिक यह नया प्रावधान केवल ग्रामीण कृषि भूमि पर लागू होगा। शहरी क्षेत्रों की जमीन पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा। यानी शहरों में 2200 वर्गफीट से कम की रजिस्ट्री पहले की तरह जारी रहेगी।
जियो-रेफरेंस नक्शे होंगे मान्य
नए कानून में तकनीक का भी सहारा लिया गया है। अब केवल जियो-रेफरेंस्ड नक्शे ही मान्य माने जाएंगे। इससे सीमांकन और बटांकन से जुड़े विवादों पर पूरी तरह से रोक लगाने का दावा किया जा रहा है।
विवादों पर लगेगा विराम
जमीन को लेकर अक्सर बंटवारे, सीमांकन और कब्जे जैसे विवाद अदालतों और तहसील कार्यालयों में वर्षों तक लंबित रहते थे। सरकार का मानना है कि जियो-रेफरेंस नक्शों और बड़े भू-खण्डों की अनिवार्यता से ऐसे विवादों में भारी कमी आएगी।
राजनीतिक हलचल भी तेज
हालांकि, इस फैसले को लेकर ग्रामीण इलाकों में राजनीतिक हलचल भी शुरू हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार किसानों की जमीन की आज़ादी पर अंकुश लगा रही है, जबकि सरकार इसे किसानों और खरीदारों दोनों के हित में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है।
आगे की राह
अब देखना होगा कि यह नया कानून जमीन के कारोबार और ग्रामीण विकास पर कितना असर डालता है। लेकिन इतना तय है कि आने वाले दिनों में छत्तीसगढ़ की जमीन नीति और रियल एस्टेट कारोबार की तस्वीर बदलने वाली है।
👉 कोरबा जिले से प्रदीप राव कि रिपोर्ट

