प्रदीप राव कि रिपोर्ट
कोरबा। जिले के ग्राम पंचायत तिलकेजा के कलमीभाठा गांव में रविवार को धार्मिक प्रार्थना सभा के दौरान अचानक हंगामा खड़ा हो गया। स्थानीय ग्रामीणों और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर आरोप है कि उन्होंने पास्टर के घर में जबरन घुसकर न केवल सभा को बाधित किया, बल्कि मारपीट और तोड़फोड़ जैसी हरकतें भी कीं। इस घटना से मसीही समाज में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।
क्या है पूरा मामला
तिलकेजा निवासी पास्टर संतोष श्रीवास अपने निवास स्थान पर हर रविवार की तरह इस सप्ताह भी अपने विश्वासियों के साथ प्रार्थना सभा कर रहे थे। इसी दौरान अचानक कुछ लोग, जिनमें ग्रामीण और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं, वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने सभा को बंद कराने की कोशिश की और विरोध करने पर विश्वासियों के साथ मारपीट की। साथ ही घर में रखी सामग्रियों को नुकसान पहुंचाया।
थाने में शिकायत, कार्रवाई की मांग
घटना के बाद पीड़ित पक्ष और मसीही समाज के लोग बड़ी संख्या में उरगा थाने पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल प्रार्थना सभा पर नहीं, बल्कि उनके धार्मिक अधिकार और विश्वास की स्वतंत्रता पर हमला है। समाज ने पुलिस प्रशासन से तत्काल आरोपियों की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
क्रिश्चियन वर्किंग कमिटी की चेतावनी
क्रिश्चियन वर्किंग कमिटी के अध्यक्ष ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा है कि यदि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो संगठन आंदोलन का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण धार्मिक गतिविधियों में बाधा डालना असंवैधानिक है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
फिलहाल पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। उरगा थाना प्रभारी ने बताया कि आरोप गंभीर हैं और तथ्यों की पुष्टि के लिए जांच की जा रही है। आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
समाज में तनाव, प्रशासन की चुनौती
इस घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। दोनों पक्षों में टकराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने शांति और सौहार्द बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
कलमीभाठा की यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि धार्मिक विश्वासों को लेकर समाज में असहिष्णुता और टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से इस मामले में कार्रवाई करता है। मसीही समाज की नजरें पुलिस की कार्रवाई और सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।





















