कोरबा
मड़वा रानी रेलवे स्टेशन में गुरुवार को बिलासपुर-गेवरारोड पैसेंजर के खाली एसी कोच के पहियों के बीच लोहे का एंगल फंसने और ट्रेन डिरेल मामले में आरपीएफ ने ठेका कंपनी के सुपरवाइजर और मजदूर को गिरफ्तार किया।
इस मामले में यह पहली कार्रवाई है और इसे रेलवे की एकपक्षीय कार्रवाई से जोड़कर देखा जार रहा है। जांच में बताया गया कि मौके पर काम कर रहे ठेका कंपनी के कर्मचारियों की लापरवाही से लोहे का भारी एंगल ट्रेन के पहियों के नीचे फंस गया था। इस कारण ट्रेन डिरेल हुई थी। यह कार्रवाई आरपीएफ व रेलवे के 6 कर्मचारियों की संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच के बाद हुई है। जबकि मामले में रेलवे के किसी भी कर्मचारियों को जिम्मेदार नहीं माना गया। हालांकि एसईसीआर बिलासपुर द्वारा कहा गया है कि इस घटना की जांच करने एक विभागीय टीम जल्द पहुंचेगी।
जांच दल ने जांच में ठेका कंपनी एसके एंड जेआरटी को दोषी ठहराया है, जबकि रेलवे के अधिकारियों कर्मचारियों को इस मामले से बचाया जा रहा है। घटना के समय कार्यरत कंपनी के अनुभवहीन श्रमिकों द्वारा किसकी अनुमति से प्लेटफार्म के समीप बिना सुरक्षा के काम कराया जा रहा था, इस बिन्दु पर जांच होनी थी। अगर श्रमिक काम कर रहे थे तो रेलवे की ओर से काम की मॉनिटरिंग की की जिम्मेदारी किसी अधिकारी को जरूर दी गई थी। जांच में इसका कहीं भी उल्लेख नहीं है। आरपीएफ बिलासपुर द्वारा ठेका कंपनी के सुपरवाइजर झारखंड निवासी परशुराम महतो व कोरबा निवासी मजदूर रामेश्वर निषाद को गिरफ्तार किया गया।
दोषियों पर हुई है कार्रवाई आरपीएफ प्रभारी सतीश कुमार ने बताया कि उनके साथ एक टीम मौके पर पहुंचकर मामले की जांच की थी। इसके आधार पर प्रारंभिक जांच में दोषी पाए गए ठेकेदार के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।





















