कोरबा जिले के बालको क्षेत्र में 8 नवंबर 2025 को एक विवाद ने नया मोड़ ले लिया, जब बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने एक पास्टर पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए उसके साथ दुर्व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पास्टर को गाली-गलौज करते हुए थप्पड़ मारा, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई।

घटना की शुरुआत
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बालको के एक इलाके में पास्टर धार्मिक सभा के सिलसिले में मौजूद थे। इस दौरान कुछ बजरंग दल के कार्यकर्ता वहां पहुंचे और उन पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख वहां लोगों की भीड़ जुट गई और माहौल गर्म हो गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास्टर को सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया और उनके साथ मारपीट की गई। हालांकि स्थानीय पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रण में ले लिया।
मसीही समाज की प्रतिक्रिया
घटना के विरोध में कोरबा चरचेस वेलफेयर एसोसिएशन समिति ने 8 नवंबर को बालको थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। समिति ने आरोप लगाया कि बीते कुछ महीनों से जिले में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ इस तरह की घटनाएँ बढ़ रही हैं, जिससे समुदाय में असुरक्षा की भावना पनप रही है।
इसके बाद 10 नवंबर 2025 को कोरबा कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में समिति के सदस्यों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन ठोस कदम उठाए।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख माँगें
हमले में शामिल सभी आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की जाए।
मसीही समाज के धार्मिक स्थलों और सभाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
जिले में धार्मिक सौहार्द बनाए रखने के लिए पुलिस की निगरानी बढ़ाई जाए।
, लेकिन सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से लगातार सतर्कता बरतने की अपील की है। कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक सहिष्णुता पर हमला बताया है और कहा है कि इस तरह की घटनाएँ समाज में नफरत फैलाने वाली शक्तियों को बढ़ावा देती हैं।
, बालको की यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश की राजनीति और सामाजिक वातावरण में भी गूंज पैदा कर रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और क्या कोरबा जिले में धार्मिक सौहार्द की मिसाल कायम रखी जा सकेगी या नहीं





















