कोरबा/पाली:- जिले के पाली विकासखण्ड के लिए बीते 2- 3 माह से घटिया, अमानक एवं टूटे (कनकी) चावल की आपूर्ति राइस मिलर्स कर रहे है। यह चावल न तो गुणवत्ता की कसौटी पर खरा उतर रही है और न ही मापदंडों के अनुरूप है। पीडीएस दुकान से वितरण होने वाले जिस टूटा हुआ कनकी चावल में कंकड़, पत्थर होने और पालिस की कमी के कारण भुरभुरे होने से मवेशी भी नही खा पा रहे है, जिसे गरीब परिवार साफकर खाने के लिए मजबूर है। ज्यादातर पीडीएस उपभोक्ता इस चावल की क्वालिटी को देख खाने की जगह दुकानों में बेच दूसरा चावल महंगे दामों में खरीद रहे है। यदि शासन की ओर से निशुल्क रूप से वितरित यह चावल मिलीभगत के खेल से परे गुणवत्तापरख होता तो शायद लोगों को इसे दुकानों में बेचने की नौबत नही पड़ती। पर जिम्मेदारों के सांठगांठ के परिणीति राइस मिलर्स से निकलकर एफएफसी गोदाम और यहां से पीडीएस दुकान तक पहुँचाकर घटिया अमानक चावल हितग्राहियों को वितरित किया जा रहा है, यह सिस्टम पर सीधा और ज्वलंत सवाल खड़े करता है। जबकि पीडीएस चावल के गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी क्वालिटी इंस्पेक्टर पर होता है, जिसके द्वारा राइस मिलर्स से निकलने वाले इस चावल की गुणवत्ता जांच कर नान को भेजा जाता है, पर यहां न तो गुणवत्ता जांच हो रही है और न ही किसी तरह की मॉनिटरिंग। पूरा का पूरा खेल मिलीभगत और कमीशनखोरी के चलते हो रहा है। जिसका खामियाजा गरीब परिवार को भुगतना पड़ रहा है। घटिया चावल आपूर्ति घोटाले के इस मानले को हमने अपने बीते कल के खबर में “पीडीएस में सप्लाई हो रहा टूटा हुआ, कम पालिस व कंकड़, पत्थर मिला घटिया चावल….. गरीब उपभोक्ता खाने की जगह बेच रहे, राइस मिलर्स से क्वालिटी इंस्पेक्टर, गोदाम प्रभारी और नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप” शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रसारित किया है। पाली विकासखण्ड में सरकारी राशन के नाम पर बांटे जा रहे जिस घटिया चावल के बारे में तो आप जान ही चुके होंगे। अब आपको आंगनबाड़ी- स्कूलों में पहुँचने वाले इस पीडीएस चावल की स्थिति बताते है। आंगनबाड़ी के नौनिहालों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन के लिए पहुँचने वाले पीडीएस चावल में इल्लियां लगी हुई पायी जा रही है। जिसकी गुणवत्ता देखकर भोजन में उपयोग कर पाना मुश्किल है, फिर भी मजबूरीवश जिस चावल को धोकर और पकाकर बच्चों को खिलाया जा रहा है। जिसके बारे में बताया जा रहा है कि इस तरह के घटिया इल्लियां, फफूंद लगा चावल का वितरण पहली बार नही हो रहा है, गत 2- 3 महीने से इसी तरह का चावल दिया जा रहा है। जिसकी शिकायत करने पर भी कोई सुनवाई नही हो पा रही है, ऐसे में इल्लियां- फफूंद लगा चावल लेना मजबूरी बन गई है। अब आप समझ गए होंगे कि कैसे संबंधित सिस्टम निजी स्वार्थ सिद्धि के लिए आम जनता से गंभीर धोखाधड़ी के साथ- साथ बच्चों के स्वास्थ्य से भी खिलवाड़ करने को लेकर जरा भी हिचक नही रहा है। यह प्रकरण न केवल शासकीय योजनाओं में भ्रष्ट्राचार करता है, बल्कि शासन की जनकल्याणकारी खाद्यान्न योजना का बंटाधार भी करना है। इस योजना में सुधार और सुसंचालन को लेकर आवश्यकता है तो शासन से अनुबंध मिलर्स द्वारा नागरिक आपूर्ति निगम को पीडीएस हेतु भेजे जाने वाले चावल के ईमानदाराना तौर पर गुणवत्ता परख की, ताकि कमीशन के फेर में और घटिया चावल के खेल में पूर्णतः विराम लग सके और शासन के इस निशुल्क खाद्यान्न योजना का लाभ गरीबों की थाली में दिख सके। SN इंडिया न्यूज से गौतम कुमार राज कि रिपोर्ट



