कोरबा, छत्तीसगढ़।
कोरबा जिले के ग्राम पंचायत भिलाईबाजार से समाजसेवी श्री प्रदीप जायसवाल ने भारत सरकार के कोयला मंत्री माननीय किशन रेड्डी को एक महत्वपूर्ण पत्र भेजकर क्षेत्र के विस्थापन और पुनर्वास से जुड़ी गंभीर समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। पत्र में उन्होंने SECL की गेवरा परियोजना के कारण प्रभावित होने वाले भिलाईबाजार ग्राम के लोगों के लिए सर्वसुविधायुक्त बसाहट, सुरक्षित पुनर्वास और बेहतर जीवन-स्तर की मांग की है।
गेवरा परियोजना के विस्तार से बढ़ी चिंता
SECL की गेवरा परियोजना एशिया की सबसे बड़ी ओपनकास्ट खदानों में से एक है। इसके विस्तार के चलते भिलाईबाजार सहित आसपास की कई बस्तियाँ सीधे प्रभावित हो रही हैं।
समाजसेवी प्रदीप जायसवाल ने पत्र में उल्लेख किया है कि परियोजना विस्तार के लिए:
मार्च 2024 में धारा 4,
जनवरी 2025 में धारा 6,
और अक्टूबर 2025 में धारा 9(क)
का प्रकाशन किया जा चुका है, जिससे स्पष्ट है कि ग्राम भिलाईबाजार का अर्जन (भूमि अधिग्रहण) अब अंतिम चरणों में पहुँच चुका है।
“सर्वमंगला नगर कोरबा में बसाहट” की प्रमुख मांग
पत्र में श्री जायसवाल ने मांग रखी है कि ग्राम भिलाईबाजार को पूर्ण रूप से अर्जित किए जाने के बाद प्रभावित परिवारों को सर्वमंगला नगर, कोरबा में सर्व-सुविधायुक्त नयी बसाहट प्रदान की जाए।
उनकी प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं—
सुरक्षित एवं व्यवस्थित पुनर्वास क्षेत्र का निर्माण
हर परिवार को आवास, बिजली, पानी, सड़क व स्वास्थ्य सुविधाएँ
बच्चों के लिए शिक्षा और परिवहन सुविधा
विस्थापित परिवारों को न्यायसंगत मुआवजा
परियोजना में स्थानीय लोगों को रोज़गार का प्राथमिक अधिकार
ग्रामीणों की दशा को लेकर चिंता
प्रदीप जायसवाल ने पत्र में चिंता जताई है कि वर्तमान परिस्थितियों में भिलाईबाजार के निवासियों को पुनर्वास के स्पष्ट विकल्प नहीं दिए गए हैं। अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, लेकिन प्रभावित परिवारों को अब तक यह जानकारी नहीं है कि उन्हें कहाँ बसाया जाएगा और उनकी आजीविका का क्या होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार और SECL दोनों की ज़िम्मेदारी है कि प्रभावित लोगों को:
सम्मानजनक जीवन,
सुरक्षित भविष्य,
और स्थायी पुनर्वास
दिया जाए, न कि केवल मुआवजा राशि।
मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
पत्र के अंत में श्री जायसवाल ने कोयला मंत्री किशन रेड्डी से आग्रह किया है कि वे इस मामले में:
तत्काल हस्तक्षेप करें,
SECL को उचित निर्देश दें,
और भिलाईबाजार के लोगों को न्यायपूर्ण तथा व्यवस्थित पुनर्वास उपलब्ध कराएँ।
उन्होंने कहा कि पुनर्वास और विस्थापन केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानव-अधिकार और सामाजिक सम्मान का विषय है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी उम्मीदें
ग्राम के कई परिवारों ने इस पहल का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकार और मंत्रालय उचित निर्णय लेते हैं तो वे नई बसाहट में बेहतर सुविधाओं के साथ नया जीवन शुरू कर पाएँगे।
























