कोरबा/पाली:- ग्राम पंचायत मुनगाडीह में 15वें वित्त की राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी का मामला गरमाता जा रहा है, जहां के ग्रामीणों द्वारा भ्रष्ट्राचार के आरोपों से घिरे सरपंच- सचिव पर जनपद अधिकारियों से मिलीभगत कर एक तय समय सीमा में जांच के आदेश को प्रभावित कर जांच से पहले कागजों में सब ठीकठाक करने जैसा आरोप लगाया है। यहां की महिला सरपंच प्रमिला कोराम और तत्कालीन सचिव नेहा आनंद ने आपसी सांठगांठ करके वर्ष 2025- 26 में प्राप्त हुई 15वें वित्त की सरकारी राशि का फर्जी तरीके से आहरण किया है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्वीकृत हुई भारी- भरकम राशि से गांव के भीतर धरातल पर ज्यादातर विकास कार्य नही कराया गया है और कुछेक कराए गए कार्यों की लागत से अधिक राशि निकाली गई है। 14 मई को पंचायत उप संचालक द्वारा पाली जनपद सीईओ को जारी जांच के आदेश और जांच ज्ञापन प्राप्ति के 03 दिवस के भीतर पंचायत में भ्रष्ट्राचार की जांच कर अभिमत सहित प्रतिवेदन मांगे जाने के मामले पर जनपद अधिकारियों द्वारा हील- हवाला के साथ भ्रष्ट्र सरपंच- सचिव को क्लीन चिट दी गई और 11 दिन बाद भी जांच रोके रखा गया है, जहां जांच पूर्व कागजों में सब ठीकठाक किया गया। बताया जा रहा है कि जियोटैग में जिन कार्यों को बताकर राशि आहरण कर ली गई है, आनन- फानन में उन सभी का कार्य आदेश, माप पुस्तिका, मस्टररोल, बोगस बिल और कार्य मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार कराकर कागजी कार्रवाई पूर्ण करा ली गई है, ताकि पंचायत दस्तावेजों में सभी कार्य होना बताया जा सके। लेकिन यदि धरातल पर भौतिक जांच की जाए तो सरपंच- सचिव के भ्रष्ट्राचार की कलई खुल जाएगी। एक मामले पर तो ईंट से निर्माण करा आरसीसी कांक्रीट का बिल प्रस्तुत किया गया है, जिसमे अधिकारी और उप अभियंता द्वारा मूल्यांकन व सत्यापन कार्य फिलहाल लंबित रखा गया है। सरपंच- सचिव के भ्रष्ट्राचार के लंबे फेहरिस्त है तथा इन्होंने कागजों में काम दिखाया है, धरातल पर वे काम या तो नदारद है या फिर स्टीमेट के विपरीत घटिया निर्माण के भेंट चढ़ गए। बहरहाल जिन्हें जांच का जिम्मा सौंपा गया है वे ही सरपंच- सचिव को क्लीन चिट देने में लगे है। इसे लेकर ग्रामीणों का कहना है कि जांच के नाम पर पंचायत पहुँचने वाली टीम भौतिक सत्यापन की जगह एक ही स्थान पर बैठे- बैठे कागजी सत्यापन में ग्राम को विकास से चमका देंगे। उनकी मांग है कि यदि जांच टीम राशि आहरण से संबंधित कामों का मौके पर सत्यापन नही करेंगे तो वे पंचायत में हुए भ्रष्ट्राचार की उच्च स्तर पर दोबारा शिकायत देंगे।
पंचायती कार्यों में सरपंच पति तो तत्कालीन सचिव पिता का दखल
भारतीय संविधान के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए न्यूनतम 33 प्रतिशत (एक तिहाई) आरक्षण अनिवार्य है। हालांकि महिला सशक्तिकरण की दिशा में उनकी नेतृत्व को प्रोत्साहित करने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में इसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत आरक्षण दे दिया है। जिसके तहत 60 फीसदी महिला जनप्रतिनिधि गांव की सरकार चला तो रहीं है, लेकिन पंचायतों में चुनी गई महिला जनप्रतिनिधियों में अधिकतर अपने पति या स्वजन के बताए अनुसार ही फैसले ले रही है। जबकि पंचायती राज मंत्रालय ने स्पष्ट कहा है कि पंचायत में यदि महिला सरपंच है तो उसका पति, सगा- संबंधी, स्वजन या रिश्तेदार ग्राम पंचायत के किसी भी कार्य मे हस्तक्षेप नही करेंगे और न ही संलिप्त रह सकते है। ऐसा करने पर महिला प्रतिनिधि पर पंचायती राज अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। किन्तु ग्राम पंचायत मुनगाडीह की महिला सरपंच का पति शासन- प्रशासन के आदेशों को खुलेआम चुनौती दे रहे है। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार महिला सरपंच के पति पंचायत के सभी कार्यों में सक्रिय रहते है। जिससे यहां महिला सरपंच की भूमिका शून्य है तथा वे रबर स्टैम्प बनकर रह गई है। सरपंच पति के पंचायती कामों में हस्तक्षेप के कारण महिला सरपंच को पंचायत क्रियाकलापों की अधिक जानकारी नही है। इसी प्रकार इस पंचायत की तत्कालीन सचिव के पिता द्वारा सभी लेखा- जोखा अपने हाथों किया जाता है। यदि सरपंच और तत्कालीन सचिव के हैंडराइटिंग का पंचायत दस्तावेजों से मिलान किया जाए तो सारी सच्चाई खुलकर सामने आ जाएगी।






