कोरबा : वर्दी व्यस्त, शहर अस्त-व्यस्त? होली का रंग अभी लोगों के चेहरों से उतरा भी नहीं था कि शहर एक बार फिर “लाल रंग” में रंग गया — इस बार अबीर-गुलाल से नहीं, बल्कि खून से। मामला सीतामढ़ी इमलीडुग्गू का है, जो सिटी कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
बताया जा रहा है कि 4–5 नशे में धुत युवकों ने धारदार हथियारों से हमला कर चार लोगों को गंभीर रूप से घायल कर दिया। चाकू और सर्जिकल ब्लेड से किए गए इस हमले ने इलाके में दहशत फैला दी।
घटना में परवीन कुमार बरेठ और मुकेश कुमार यादव को गंभीर चोटें आई हैं, जबकि धन सिंह और मोहन ठाकुर भी घायल हुए हैं। सवाल यह नहीं कि हमला कैसे हुआ… सवाल यह है कि ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं?
🚨 पुलिस चौकी के पास चोरी, शहर में चाकूबाजी
कभी पुलिस चौकी के पास चोरी हो जाती है, तो कभी शहर के बीचों-बीच चाकूबाजी।
लेकिन चिंता की बात? शायद नहीं!
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से नशे का अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है। नशा बढ़ा, तो चाकूबाजी भी बढ़ी — यह समीकरण अब इतना सामान्य हो गया है कि लोग इसे “शहर की नई पहचान” मानने लगे हैं।
💼 कार्रवाई या औपचारिकता?
घटना के बाद लोग बड़ी संख्या में कोतवाली पहुंचे और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, बल भी तैनात कर दिया गया है — यानी कागज़ी प्रक्रिया पूरी।
पर जनता पूछ रही है —
*क्या नशे के अड्डों पर कभी स्थायी कार्रवाई होगी?
*क्या आदतन अपराधियों पर सख्ती होगी?
*या फिर अगली घटना तक सब कुछ सामान्य माना जाएगा?
🎭 होली का रंग या खून का दाग?
त्योहार के बीच हुई इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि शहर में “रंग” बदल रहा है।
जहाँ एक तरफ लोग शांति और सुरक्षा की उम्मीद करते हैं, वहीं दूसरी तरफ असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद नजर आते हैं।
अगर हालात ऐसे ही रहे तो हो सकता है अगली होली पर लोग रंगों से ज्यादा “सुरक्षा” की दुआ मांगते दिखें।





















