कोरबा,15मार्च । धान उपार्जन सीजन 2025- 26 कोरबा जिले में धान खरीदी करने वाली अनेक समितियां के मामले में अभिशाप साबित हो रहा है। खरीदी की अंतिम तारीख खत्म होने और प्रशासन के दिशा निर्देश के बाद भी शत प्रतिशत धान का उठाव केंद्रों से नहीं हुआ है। राइस मिलर्स इस मामले में जनबूझकर देरी कर रहे हैं। वही उपार्जन केंद्र के कर्ताधर्ताओं पर सूखत की मात्रा देने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। वही सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने सवाल किया है कि सिस्टम की गलती से अगर उठाव नही हो रहा है तो इसके लिए हम दोषी कैसे और भरपाई की जिम्मेदारी हमारी क्यों?
कोरबा जिले में 49 समितियां के अंतर्गत 65 उपार्जन केंद्रों में धान की खरीदी सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य पर की गई। 15 नवंबर से इस काम को औपचारिक रूप से शुरू किया गया जो अंतिम रूप से 31 जनवरी को समाप्त हो गया। इस दौरान लगभग 17000 किसान बेचने से वंचित रहे। चौतर$फा दबाव बनने पर सरकार ने 5 और 6 फरवरी को 2 दिन का समय अतिरिक्त रूप से दिया और इसमें भी गिनती के किसानों को अपनी पैदावार बेचने का अवसर प्राप्त हो सका। एक तरफ किसानों का टेंशन तो दूसरी तरफ केंद्र में जमा हुई पैदावार को समय रहते यहां से उठाने की चुनौती ने सहकारी समितियां को लंबे समय तक परेशानी में डाला। अभी की स्थिति में कोरबा से लेकर छुरिकला, श्यांग, बरपाली जिलगा, चिर्रा, सिरमिना, सहित अनेक उपार्जन केदो में धान की बड़ी मात्रा पड़ी हुई है जिसका उठाव नहीं हो सका है। इस मसले को लेकर परेशान चल रहे सहकारी समिति कर्मचारी संघ का कहना है कि जानबूझकर राइस मिलर्स धान का उठाव करने में देर कर रहे है। इस तरह की सूचना प्राप्त हुई है कि देरी होने पर धान में ड्राइनेस की समस्या होगी और फिर सूखत के लिए दबाव बनाया जाएगा। खबर है कि पहले ही 50 से 100 ग्राम तक की मात्रा को लेकर हल्ला किया गया और अब सरकारी व प्राकृतिक कारणों से पैदा होने वाली समस्या और इसकी भरपाई को लेकर कोई चर्चा नही हो रही है। सहकारी समिति कर्मचारी संघ का कहना है कि जब हमारे यहां अपने स्तर पर धान की खरीदी हो गई और प्रशासन की ओर से साथ-साथ उठाव कराने के दावे किए गए तो फिर काम क्यों नहीं हुआ। इस वजह से पैदा हुई परिस्थितियों के लिए सहकारी समितियां और उनके लोग जिम्मेदार कैसे हो गए। कर्मचारी संघ ने कहा है जानबूझकर उठाव के कार्य में देरी होने पर राइस मिलर्स जिम्मेदार है, हम नहीं। और इसके लिए सुखत जैसी समस्या की कोई रिकवरी करने का सवाल पैदा नहीं होता है। पुरजोर तरीके से हम इस बात को सरकार के मुख्यमंत्री के साथ-साथ राज्य के संबंधित अधिकारियों तक भिजवा रहे हैं। कहा गया कि तमाम तरह की उलझन के बीच कामकाज संपादित करना और फिर बाद में अपना ही नुकसान कराना आखिर कौन सी नीति है। किसी भी कीमत पर ऐसे दोहरे मापदंडों को बिल्कुल स्वीकार नहीं किया जाएगा।


