कोरबा SN इंडिया न्यूज कि रिपोर्ट जिले में अवैध ईंट भट्ठों पर जिला प्रशासन नकेल कसने में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। सड़क के किनारे से लेकर जंगल के अंदरूनी इलाके में तक इन भट्ठों की आग सुलग रही है। रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर प्रदेश भर में बवाल के बीच अवैध भट्ठों की आंच को अनदेखा किया जा रहा है। कोरबा शहर के मुख्य सड़कों से लेकर घने जंगलों के अंदरूनी हिस्सों तक अवैध ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं।
राजस्व की बड़ी चपतः बिना अनुमति और रायल्टी
चुकाए चल रहे इन भट्ठों के कारण शासन को हर साल लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
पर्यावरण विनाशः भट्ठों में अवैध रूप से काटी गई
लकड़ियों का उपयोग हो रहा है, जिससे वन संपदा नष्ट हो रही है। साथ ही, एनजीटी (NGT) के निर्देशों के बावजूद फ्लाई ऐश ब्रिक्स के स्थान पर लाल ईंटों का निर्माण जारी है।
अवैध संसाधनों का उपभोगः इस कारोबार में न केवल मिट्टी, बल्कि अवैध रूप से खनन की गई रेत और कोयले का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है।
प्रशासनिक विफलताः जिले में रेत के अवैध परिवहन
पर तो खनिज विभाग की भाग-दौड़ दिखती है, लेकिन सरेआम सुलगते ये भट्ठे अधिकारियों की नजर से ओझल हैं।
दिसंबर 2025 में प्रशासन ने हरदीबाजार क्षेत्र में 18 अवैध ईंट भट्ठों को सील कर 9 लाख ईंटें और मशीनें जब्त की थीं, लेकिन ताज़ा रिपोर्ट बताती है कि कार्रवाई के अभाव में यह धंधा फिर से जोर पकड़ चुका है।
कोरबा शहर के आसपास की बात करें तो शहर के नजदीक ही दादर-ढेलवाडीह के जंगल क्षेत्र पर लाल ईट भट्ठों का संचालन ज़ोर-शोर से किया जा रहा है। यही हाल कटघोरा, रिस्दी, भवानी मंदिर रोड का भी है। इन अवैध भट्ठों पर कार्रवाई करने में खनिज विभाग के अधिकारी तनिक भी रूचि नहीं ले रहे हैं।





















