कोरबा/पाली:- पंचायतों में जहां सरकार पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त कराने पुराने हेण्डपम्पों में सबमर्सिबल पंप- सिंटेक्स, बोर खनन और शासकीय संस्थानों में रनिंग वाटर सिस्टम के लिए हस्तमुक्त आबंटन दे रही है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट समाप्त किया जा सके लेकिन भ्रष्ट्राचार का आलम तो यह है कि इस योजना पर पंचायत जिम्मेदारों का बंदरबांट भारी पड़ रहा है और सरकार के शुद्ध पेयजल उपलब्धता के दावे को सरपंच- सचिव गर्त में ले जाने की अहम भूमिका निभा रहे है। कुछ ऐसा ही मामला जिले के ग्राम पंचायत तालापार का सामने आया है जहां पेयजल व्यवस्था के नाम पर लाखों तो खर्च बताया गया लेकिन गांव के सर्वे में तस्वीर कुछ और नजर आ रही है। जहां अधिकतर महिलाएं आज भी हेंडपम्प चलाकर पीने का पानी भरने मजबूर है।
पाली जनपद के ग्राम पंचायत तालापार, जहां बीते पंचवर्षीय सरपंच कार्यकाल से अबतक पेयजल व्यवस्था पर मूलभूत, 14वें एवं 15वें वित्त से लाखों फूंके गए किंतु हकीकत यह है कि इस पंचायत के आबादी की ज्यादातर महिलाएं पीएचई के हेंडपम्प पर हाथ चलाकर पीने के पानी का व्यव्यस्था कर रही है, जबकि पंचायत के फाइलों में पेयजल व्यवस्था के नाम पर सबमर्सिबल पंप व सिंटेक्स की भरमार है और गांव में सुलभ पेयजल की धारा बह रही है। बता दें कि तालापार पंचायत में तात्कालीन सरपंच गंगाराम श्याम व वर्तमान निर्वाचित सरपंच रमा श्याम है। जहां तात्कालीन और वर्तमान सरपंच के अबतक के कार्यकाल में बेहिसाब राशि हेंडपम्प में सबमर्सिबल व सिंटेक्स, बोर खनन और पेयजल पाइप लाइन विस्तार के नाम पर सरकारी खाते से निकाले गए है, परंतु गांव की तस्वीर यह है कि महिलाएं पेयजल के लिए जद्दोजहद कर रही है। ग्रामीण बताते है कि गांव में गिने- चुने स्थान पर पुराने हेण्डपम्पों में सबमर्सिबल पम्प और सिंटेक्स स्थापना किया गया है, वहीं अधिकतर हेंडपम्प हाथ चलाने पर पानी उगलता है, दुर्दशा यह है कि घर की महिलाएं अलसुबह से ही पीने के पानी के लिए हेंडपम्प में हाथ चलाने को मजबूर रहती है तब कहीं जाकर पीने का पानी घर आता है। ग्रामीणजन पेयजल की परेशानी को बताते हुए ग्राम सरपंच और सचिव के कारनामे को लेकर आक्रोशित देखे जा रहे है। कई ग्रामीणों ने यह भी बताया कि हमारे घर के सामने जो हेंडपम्प लगा है उसमें बोर पंप लगाने सरपंच को कई बार कहा गया लेकिन मात्र आश्वासन से ही काम चलाया जा रहा है। मजबूरन घर की औरतों को हाथ चलाकर पीने के पानी की व्यवस्था करनी पड़ रही है। गांव के जागरूक वर्गों का भी कथन है कि पेयजल व्यवस्था के नाम पर सरपंच- सचिव ने लाखों के हेराफेरी की है। जहां बिना काम कराए पंचायत खाते से मनमाने धनराशि निकाल वारा- न्यारा किया गया है। बहरहाल इस पंचायत में ग्रामीणों के हिस्से के पानी पीकर लाखों डकारने के अनियमितता को अगले खबर में विस्तृत किया जाएगा।





















