जबलपुर जिले में RTO के नाम पर नेशनल हाईवे पर चल रही अवैध वसूली के मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। चेकिंग के नाम पर वाहनों को रोककर ट्रक चालकों से अनावश्यक पूछताछ और दबाव बनाया जा रहा है। जब इस संबंध में आरटीओ में पदस्थ सब इंस्पेक्टर अक्षय पटेल से यह पूछा गया कि क्या उनके पास उक्त चेकिंग का कोई वैध आदेश है, तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर देने के बजाय उल्टा सवाल उठाने वाले पत्रकार पर ही आरोप लगा दिया। इससे पूरे प्रकरण ने जनहित और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
बताया गया है कि संबंधित अधिकारी ने आरोप लगाया कि उनसे मंडला जिले में पत्रकार जसवंत सिंह राजपूत द्वारा 5000 रुपए की मांग की गई थी। जबकि पत्रकार जसवंत सिंह राजपूत अधिकारी से पहली बार मिले थे, न तो पूर्व में कोई प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष या फोन पर संवाद हुआ और न ही किसी प्रकार का लेन-देन। ऐसे में बिना किसी ठोस आधार के इस प्रकार का आरोप लगाया जाना संदेह को और गहरा करता है। अब सवाल यह उठता है कि यदि पैसे मांगने की घटना हुई, तो उसकी तारीख, समय और स्थान क्या था?
संबंधित अधिकारी को विधिवत नोटिस जारी करने की तैयारी पूरी कर ली गई है। नोटिस में स्पष्ट रूप से पूछा जाएगा कि कथित धन मांगने की घटना कब और किस परिस्थिति में हुई। साथ ही नेशनल हाईवे पर ट्रक चालकों को रोककर कथित अवैध वसूली करने और अनावश्यक रूप से परेशान करने के भी कई प्रमाण एकत्रित हैं। अब यह न केवल विभागीय अनुशासन का उल्लंघन है, बल्कि आम जनता के अधिकारों का भी हनन है।
प्रकरण को अब कानूनी मोर्चे पर ले जाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है और संबंधित तथ्यों को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी की जा रही है। जनहित से जुड़े इस मामले में पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है और अवैध वसूली जैसी प्रवृत्तियों पर सख्त संदेश देगा।





















