कोरबा, छत्तीसगढ़। कोरबा जिले के तेलसरा , छुरी ,आर्दा,गजरा, इलाक़े क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रूप से चल रहे गांजा और कच्ची शराब के कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इन इलाकों में खुलेआम नशे की बिक्री होने से माहौल बिगड़ रहा है, वहीं युवाओं पर इसका नकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है।





“खुलेआम बिक्री… फिर भी कार्रवाई नहीं” — स्थानीय निवासियों का आरोप
स्थानीय निवासियों के अनुसार, शाम होते ही इन इलाकों में नशे का व्यापार सक्रिय हो जाता है। शिकायत करने वालों का कहना है कि अवैध गतिविधियों के बावजूद संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती।
कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि “यदि आबकारी और पुलिस की नियमित गश्त होती, तो इतने बड़े पैमाने पर यह कारोबार संभव ही नहीं होता।”
, लेकिन लोगों की बढ़ती शिकायतें संकेत देती हैं कि स्थिति गंभीर है और तुरंत जांच की आवश्यकता है।
आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले में आम जनता का एक बड़ा हिस्सा आबकारी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है। लोगों का आरोप है कि विभाग की मौजूदगी के बावजूद इस तरह का कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे संदेह पैदा होता है कि कहीं न कहीं लापरवाही या मिलीभगत जैसी बातें सामने आ सकती हैं।
कुछ लोगों ने दावा किया कि अवैध व्यापारियों को कथित रूप से “संरक्षण” मिल रहा है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर नेटवर्क बेहद संगठित होता है और इन पर अंकुश लगाने के लिए सख्त, लगातार एवं पारदर्शी कार्रवाई की आवश्यकता होती है।
युवाओं के भविष्य को लेकर बढ़ी चिंता
इन क्षेत्रों के सामाजिक कार्यकर्ता बताते हैं कि नशे तक आसान पहुँच युवाओं को गलत दिशा में धकेल रही है।
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा,
“आज हर मोहल्ले में नशे की चर्चा है। बच्चे और किशोर आसानी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और बिगड़ेगी।”
स्थानीय प्रशासन क्या कर रहा है?
जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि—
अवैध व्यापार पर विशेष अभियान चलाया जाए
क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाई जाए
दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो
कोरबा जिले के इन इलाकों में अवैध नशे के कारोबार को लेकर लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है। शिकायतें और आरोप भले ही आधिकारिक रूप से सिद्ध न हों, लेकिन जिस पैमाने पर स्थानीय लोग अपनी आवाज़ उठा रहे हैं, वह संकेत देता है कि समस्या गंभीर है और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल और कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।





















