भिलाईबाजार (छत्तीसगढ़)।
भिलाईबाजार क्षेत्र के खदान प्रभावित ग्रामीणों की वर्षों पुरानी बसाहट की मांग ने अब एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। ग्रामीणों ने सर्वमंगला नगर को अपने पुनर्वास के लिए उपयुक्त स्थल बताते हुए प्रशासन से सर्व सुविधायुक्त पुनर्वास स्थल की मांग की है। इस बीच क्षेत्र के विधायक प्रेमचंद पटेल ने भी ग्रामीणों की मांग का समर्थन करते हुए जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर मामले में जल्द कार्रवाई की अपील की है।
ग्रामीणों की पीड़ा – खदानों की धूल और दरारों में बीत रहा जीवन
भिलाईबाजार क्षेत्र के आसपास संचालित खदानों की गतिविधियों ने स्थानीय लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। खदानों के लगातार विस्फोटों और भारी वाहनों की आवाजाही से कई गांवों के मकानों में दरारें आ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि धूल, शोर और प्रदूषण के कारण बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। एक ग्रामीण महिला ने कहा –
“हम रोज़ सुबह खदान की आवाज़ से जागते हैं और धूल में जीते हैं। हमें बस एक सुरक्षित जगह चाहिए जहाँ बच्चे चैन से पढ़ सकें।”
सर्वमंगला नगर – ग्रामीणों की पसंद
ग्रामीणों का कहना है कि सर्वमंगला नगर पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है। यह स्थान भिलाईबाजार के निकट होने के साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन सुविधाओं के लिहाज़ से बेहतर है। ग्रामीणों ने प्रशासन को सौंपे अपने प्रस्ताव में कहा है कि सर्वमंगला नगर में यदि पुनर्वास की व्यवस्था की जाती है, तो वे स्वेच्छा से वहाँ बसने को तैयार हैं।
विधायक प्रेमचंद पटेल की पहल से बढ़ी उम्मीदें
विधायक प्रेमचंद पटेल ने जिला कलेक्टर को भेजे पत्र में कहा है कि खदान प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा लंबे समय से लंबित है और इसे अब प्राथमिकता से हल किया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि पुनर्वास स्थल को केवल जमीन के आवंटन तक सीमित न रखा जाए, बल्कि वहां पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी और सामुदायिक भवन जैसी सभी मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएं।
पटेल ने कहा –
“यह केवल पुनर्वास का नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन, शिक्षा और भविष्य का प्रश्न है। सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए शीघ्र ठोस कदम उठाने चाहिए।”
प्रशासन ने कहा – प्रस्ताव पर विचार जारी
जिला प्रशासन ने पुष्टि की है कि ग्रामीणों का प्रस्ताव और विधायक का पत्र प्राप्त हो चुका है। कलेक्टर कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पुनर्वास के लिए भूमि चयन, पर्यावरणीय अनुमति और बजटीय प्रावधान जैसे बिंदुओं पर चर्चा जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट तैयार होने के बाद आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
भविष्य की उम्मीद
भिलाईबाजार के खदान प्रभावित ग्रामीणों की यह मांग अब प्रशासन और सरकार के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी बन चुकी है। यदि सर्वमंगला नगर में पुनर्वास का निर्णय लिया जाता है, तो यह न केवल प्रभावित परिवारों के लिए राहत की सांस लाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ में पुनर्वास नीति के एक नए मानक की स्थापना भी कर सकता है
भिलाईबाजार (छत्तीसगढ़)।
खदानों के कारण विस्थापन की मार झेल रहे भिलाईबाजार क्षेत्र के ग्रामीणों ने अब सर्वमंगला नगर में पुनर्वास की मांग तेज कर दी है। स्थानीय जनता की पीड़ा और लंबे समय से लंबित मांग को देखते हुए क्षेत्र के जनप्रतिनिधि प्रेमचंद पटेल ने भी जिला कलेक्टर को एक विस्तृत पत्र लिखकर प्रशासन से ग्रामीणों के लिए सर्व सुविधायुक्त पुनर्वास स्थल उपलब्ध कराने की मांग की है।
ग्रामीणों की गुहार – “हम सिर्फ जमीन नहीं, अपना घर चाहते हैं”
भिलाईबाजार के आसपास चल रही खदान गतिविधियों से प्रभावित गांवों के लोगों का कहना है कि लगातार खनन कार्य के चलते उनके घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं, पेयजल और स्वच्छ वायु की समस्या बढ़ गई है। ग्रामीणों ने कहा कि वे वर्षों से पुनर्वास की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
एक ग्रामीण ने कहा – “हम सिर्फ जमीन नहीं, अपना घर चाहते हैं जहाँ हमारे बच्चों को स्कूल, अस्पताल और रोज़गार की सुविधा मिले।”
सर्वमंगला नगर को बनाया जाए नया ठिकाना
ग्रामीणों ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि सर्वमंगला नगर पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है। यह जगह न केवल भिलाईबाजार के समीप है, बल्कि यहां परिवहन, शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएँ भी विकसित की जा सकती हैं। लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो खदान प्रभावित परिवारों के जीवन में स्थायित्व और सुरक्षा दोनों लौट आएंगे।
प्रेमचंद पटेल की पहल – प्रशासन से उम्मीदें बढ़ीं
स्थानीय जनप्रतिनिधि प्रेमचंद पटेल ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पुनर्वास का विषय केवल भूमि हस्तांतरण का मामला नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों परिवारों के जीवन और भविष्य से जुड़ा मानवीय मुद्दा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि
“पुनर्वास स्थल में पेयजल, बिजली, सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।”
पटेल की इस पहल से ग्रामीणों में नई उम्मीद जगी है कि शायद अब उनकी आवाज़ प्रशासनिक गलियारों तक पहुँच सकेगी।
प्रशासन ने कहा – प्रस्ताव पर विचार जारी
कलेक्टर कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों के प्रस्ताव और जनप्रतिनिधि के पत्र को संज्ञान में लिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पुनर्वास की प्रक्रिया में जमीन की उपलब्धता, पर्यावरणीय स्वीकृति और बजटीय प्रावधान जैसे पहलुओं की जांच की जा रही है।
हालाँकि ग्रामीणों का कहना है कि “जांच में समय लग सकता है, लेकिन हमारे बच्चों का भविष्य इंतज़ार नहीं कर सकता।”
आगे की राह
भिलाईबाजार के खदान प्रभावित ग्रामीणों की यह लड़ाई केवल पुनर्वास की नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन की लड़ाई बन चुकी है। प्रशासन, उद्योग और जनता के बीच संतुलन बनाते हुए यदि इस मुद्दे का समाधान किया गया, तो यह छत्तीसगढ़ में पुनर्वास नीति के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है


