कोरबा–चांपा मार्ग की जर्जर सड़क की मरम्मत के लिए स्वीकृत लगभग 25 लाख रुपए अब सवालों के घेरे में हैं। पीडब्ल्यूडी द्वारा ग्लोबल कंस्ट्रक्शन को सौंपा गया यह कार्य अब घोर लापरवाही और अनियमितता का उदाहरण बन चुका है। सड़को को मजबूती देने के लिए अनिवार्य इमल्शन का उपयोग करना चाहिए, परंतु मरम्मत के दौरान इमल्शन की जगह रंग मिला पानी डालकर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। कई स्थानों पर बिना किसी इमल्शन के ही सीधे डामर बिछा दिया गया — जिससे सड़क की गुणवत्ता पहले से ही संदिग्ध हो गई है।सबसे गंभीर बात यह है कि पूरे मामले की जानकारी SDO व विभागीय इंजीनियरों तक है, फिर भी निर्माण स्थल पर न तो निगरानी हो रही है और न ही गुणवत्ता जांच। नियम साफ कहते हैं कि अधिकारी को मौके पर मौजूद रहकर गुणवत्ता सुनिश्चित करनी चाहिए, लेकिन यहाँ कागजों पर ही “उत्कृष्ट सड़क मरम्मत” दिखा दी गई है, जबकि जमीनी सच्चाई पूरी तरह उलट है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठेकेदार और विभाग के कुछ अधिकारी मिलकर सड़क मरम्मत की आड़ में सार्वजनिक धन की खुली लूट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह सड़क फिर से टूटने लगे तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—यह बड़ा सवाल है।
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