लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि चाहे अस्पताल कितना भी अत्याधुनिक क्यों न हो, यदि उसके पास वैध लाइसेंस नहीं है तो उसका संचालन नियमों के खिलाफ माना जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की प्रक्रिया स्पष्ट
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार किसी भी निजी अस्पताल को लाइसेंस देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि वहां मरीजों की सुरक्षा से जुड़े सभी मानक पूरे हों। कई बार निरीक्षण के दौरान कमियां मिलने पर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं और उसके बाद ही अनुमति दी जाती है।
ऐसे में यदि बिना निरीक्षण और अनुमोदन के अस्पताल संचालन शुरू कर दिया जाता है, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़ा करता है।
मंत्री के आने का दावा
अस्पताल प्रबंधन की ओर से यह भी दावा किया जा रहा है कि उद्घाटन कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल शामिल हो सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि वास्तव में मंत्री के कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, तो क्या स्वास्थ्य विभाग की औपचारिकताएं पूरी होने से पहले ही अस्पताल का उद्घाटन किया जाएगा?
प्रबंधन से पक्ष जानने की कोशिश
इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए “शिवाय हॉस्पिटल” के डायरेक्टर डॉ. दैविक एच. मित्तल से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनके मोबाइल नंबर 7720951111 पर कॉल किया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ।
इसके बाद उन्हें व्हाट्सएप और एसएमएस के माध्यम से भी संदेश भेजकर प्रतिक्रिया मांगी गई है। समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
पक्ष आने पर किया जाएगा प्रकाशित
यदि अस्पताल प्रबंधन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
फिलहाल उद्घाटन से ठीक पहले लाइसेंस को लेकर उठे सवालों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या स्वास्थ्य विभाग की सभी प्रक्रियाएं पूरी होने से पहले ही अस्पताल का संचालन शुरू हो जाएगा, या फिर नियमों के अनुसार पहले लाइसेंस जारी किया जाएगा।





















