कोरबा : शहर का व्यस्ततम घंटाघर इलाका अब दो अलग-अलग शिफ्ट में काम करता नजर आ रहा है—दिन में जनता परेशान, और रात में ‘खास मेहमानों’ की मौज। बिलासा ब्लड बैंक के पास निगम कॉम्प्लेक्स की सार्वजनिक सीढ़ियों पर हुआ अवैध कब्जा अब सिर्फ रास्ता रोकने तक सीमित नहीं, बल्कि “रात्रीकालीन सुविधा केंद्र” में तब्दील होता दिख रहा है।
सूत्रों के हवाले से खबर है कि जैसे ही शहर की दुकानें बंद होती हैं, यहां “असली दुकान” खुल जाती है। दिन में जहां आम आदमी सीढ़ियां ढूंढता रह जाता है, वहीं रात में वही जगह शराबियों के लिए “आरामगाह” बन जाती है—बैठने की पूरी व्यवस्था, माहौल भी सेट और कथित तौर पर कोई डर भी नहीं।
सबसे बड़ा तंज:
कहा जा रहा है कि दुकान संचालक खुलेआम दावा करता है—“सब सेटिंग है, टेंशन की कोई बात नहीं!”
अब सवाल ये है कि ये “सेटिंग” आखिर किस लेवल तक सेट है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय यहां शराबखोरी आम बात हो गई है, जिसके चलते आए दिन मारपीट और एक्सीडेंट की घटनाएं सामने आ रही हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न पुलिस को कुछ दिख रहा है, न नगर निगम को कुछ सुनाई दे रहा है।
प्रशासन पर कटाक्ष:
लगता है घंटाघर में दो कानून चलते हैं—एक दिन का और एक रात का। दिन में नियम-कायदे किताबों में रहते हैं, और रात में “सेटिंग” मैदान में उतर आती है।
जनता का सवाल:
क्या सार्वजनिक सीढ़ियां अब “प्राइवेट बार” के लिए आरक्षित हो चुकी हैं?
और क्या जिम्मेदार विभागों की आंखें सिर्फ सूरज निकलने तक ही खुली रहती हैं?
अब देखना ये है कि इस “रात के कारोबार” पर कब तक पर्दा पड़ा रहता है… या फिर किसी दिन ये मामला भी सिर्फ चर्चा बनकर रह जाएगा।


