*कोरबा/पाली:-* शिक्षा विभाग का दावा है गुणवत्तापरख शिक्षा। लेकिन पाली नगर के शासकीय हाईस्कूल की हकीकत इस दावे की पोल खोल रही है। यहां 9वीं से 12वीं तक के बच्चों को पढ़ाने के लिए 18 नियमित शिक्षक- शिक्षिकाएं और लगभग 6 मानदेय शिक्षक पदस्थ हैं। ऐसे में यहां स्टाफ की कमी नही, फिर भी पढ़ाई का स्तर सकारात्मक नही है। कारण यह कि अधिकतर शिक्षक- शिक्षिकाएं खुद ही टाइम पर नही आते।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली हाईस्कूल में पदस्थ ज्यादातर शिक्षक- शिक्षिकाएं सीमावर्ती जिला बिलासपुर से अप- डाउन करते हैं। स्कूल का समय सुबह 7 बजे का है। लेकिन इनका स्कूल पहुँचने का समय है दोपहर 12 बजे, और शाम होते ही 4 बजे स्कूल छोड़कर वापस बिलासपुर के लिए निकल जाते हैं। यानि निर्धारित पढ़ाई में से सिर्फ 3- 4 घंटे ही स्कूल में रहते हैं। ऐसे में छात्र- छात्राओं को पूरा सिलेबस कैसे मिलेगा? शिक्षकों के इस मनमाने अप- डाउन से छात्रों का भविष्य दांव पर है तथा इससे विषय समय पर पूरे नही हो पा रहे और परीक्षा के समय कोर्स अधूरा रह जाते हैं। ये समस्या सिर्फ नगर के हाईस्कूल की नही, वरन पाली ब्लाक के बकसाही, मुनगाडीह, पोड़ी, सिल्ली, लाफा, माखनपुर, नुनेरा, चैतमा, मांगामार, रजकम्मा (मदनपुर) हाईस्कूल के ज्यादातर शिक्षक- शिक्षिकाएं बाहर से आना- जाना करते हैं। कोई बिलासपुर, तो कोई कोरबा, तो कोई रतनपुर से। जो समय पर स्कूल पहुँच नही पाते और समय से पहले वापस चले जाते हैं। शासन- प्रशासन द्वारा ऐसे शिक्षकों के ऊपर समय- समय पर अनुशासन का डंडा चलाया भी जाता है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा भी नोटिस जारी होता है, निरीक्षण होता है। लेकिन कुछ दिन बाद ही शिक्षक फिर अपने पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। इस हालात में जब शिक्षक ही समय पर नही आएंगे तो शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा? अभिभावकों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की मांग है कि शासन- प्रशासन इस पर ठोस कदम उठाए तथा समय पर स्कूल न पहुँचने वाले शिक्षकों पर सिर्फ नोटिस की औपचारिकता नही, बल्कि कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करें, साथ ही स्थानीय शिक्षकों की पदस्थापना को प्राथमिकता दी जाए। क्योंकि जब तक शिक्षकों का टाइम टेबल नही सुधरेगा, तब तक बच्चों का भविष्य भी नही सुधरेगा।












