SN इंडिया न्यूज | कोरबा। ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में 29 वर्षीय मरीज की मौत के बाद अस्पताल की व्यवस्था और वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि मरीज को वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी मिलने के बाद वे उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन वहां पहुंचने पर वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई। इसके बाद मरीज को लेकर परिजनों को दूसरे अस्पतालों की ओर भटकना पड़ा।
मामला जांजगीर-चांपा जिले के कचंदा निवासी अरुण दास (29) का बताया जा रहा है। परिजनों के अनुसार 14 सितंबर को अरुण को जिला अस्पताल कोरबा में भर्ती कराया गया था। अगले दिन उसकी हालत बिगड़ने पर सांस लेने में परेशानी बढ़ गई, जिसके बाद परिजनों ने उसे निजी अस्पताल में ले जाने का निर्णय लिया।
परिजनों का दावा है कि रात करीब 11:40 बजे शिवाय हॉस्पिटल से वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर बातचीत हुई। जानकारी मिलने के बाद वे वेंटिलेटर लगी एंबुलेंस से मरीज को लेकर करीब रात 12:30 से 1 बजे के बीच अस्पताल पहुंचे। आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई।
परिजनों के मुताबिक, गंभीर हालत में मरीज को लेकर उन्हें दूसरे अस्पताल की ओर जाना पड़ा और इस पूरी कवायद में करीब 2 से 3 घंटे का समय बीत गया। बाद में मरीज को दोबारा शिवाय हॉस्पिटल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत के बाद सामने आया परिजनों का वीडियो
मरीज की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर से घटनाक्रम को लेकर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। वीडियो में परिजन वेंटिलेटर की जानकारी और मरीज को लेकर हुई कथित भागदौड़ पर सवाल उठाते दिखाई दे रहे हैं।
परिजनों का कहना है कि यदि उन्हें शुरुआत में ही वेंटिलेटर की वास्तविक स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिल जाती, तो वे मरीज को किसी अन्य अस्पताल में समय रहते ले जा सकते थे।
कलेक्टर से जांच की मांग
मृतक के चाचा कैलाश दास सहित अन्य परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए जिला कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायत में अस्पताल प्रबंधन और संबंधित व्यक्ति की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई है।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोप परिजनों की शिकायत और उनके वीडियो पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। अस्पताल प्रबंधन या संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गंभीर मरीज को वेंटिलेटर की उपलब्धता को लेकर वास्तव में क्या जानकारी दी गई थी और अस्पताल पहुंचने के बाद स्थिति क्यों बदली? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।



