कार्रवाई के दौरान सिविल ड्रेस में दिख रहे लोग कौन? आबकारी टीम के साथ उनकी क्या भूमिका थी—जांच का विषय
बिलासपुर/एसएन इंडिया न्यूज। बिल्हा आबकारी सर्किल में कथित अवैध वसूली और कार्रवाई के नाम पर पैसों की मांग का मामला सामने आने के बाद आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें एक महिला आबकारी टीम पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है।
महिला के मुताबिक, आबकारी विभाग की टीम सुबह करीब 4 बजे उनके घर पहुंची और कार्रवाई की। महिला का दावा है कि घर से कथित तौर पर बेहद कम मात्रा में गांजा मिलने के बाद उसके बेटे को पकड़ लिया गया। आरोप है कि मामला दर्ज नहीं करने के एवज में पहले 80 हजार और फिर 70 हजार रुपये की मांग की गई तथा बातचीत के बाद कथित तौर पर 50 हजार रुपये में मामला तय हुआ।
40 हजार रुपये नकद, मोबाइल और DVR ले जाने का आरोप
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि टीम उनके घर से करीब 40 हजार रुपये नकद, मोबाइल फोन तथा सीसीटीवी कैमरे का DVR भी अपने साथ ले गई। महिला वीडियो में शेष रकम की व्यवस्था करने की बात कहती सुनाई देती है और आरोप लगाती है कि इसके बावजूद उसके बेटे को वाहन में बैठाकर ले जाया गया।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और आबकारी विभाग की ओर से मामले में आधिकारिक स्पष्टीकरण अथवा जांच का विवरण सामने आना बाकी है।
सबसे बड़ा सवाल—सिविल ड्रेस में नजर आ रहे लोग आखिर कौन?
वायरल वीडियो का एक पहलू जांच के दायरे में आना बेहद जरूरी है। कार्रवाई के दौरान वर्दी में मौजूद आबकारी कर्मियों के अलावा सिविल ड्रेस में कुछ लोग भी नजर आ रहे हैं।
सवाल यह है कि ये लोग कौन थे?
क्या ये आबकारी विभाग के अधिकृत कर्मचारी थे?
क्या इनके पास कार्रवाई में शामिल होने का कोई अधिकार या लिखित आदेश था?
यदि ये आबकारी विभाग से जुड़े नहीं थे, तो फिर कार्रवाई के दौरान मौके पर उनकी मौजूदगी किस आधार पर थी?
और यदि वे विभागीय टीम का हिस्सा थे, तो उनकी पहचान और पद मौके की कार्रवाई के दस्तावेजों में दर्ज हैं या नहीं?
यह पूरा पहलू निष्पक्ष जांच का विषय बनता है। केवल यह कह देना पर्याप्त नहीं होगा कि कार्रवाई आबकारी टीम ने की थी। जांच में मौके पर मौजूद प्रत्येक व्यक्ति की पहचान, पद, विभाग से संबंध और कार्रवाई में उसकी भूमिका स्पष्ट होना जरूरी है।
पंचनामा से लेकर जब्ती तक—हर प्रक्रिया की हो जांच
मामले में यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि कथित कार्रवाई के दौरान जब्ती पंचनामा बनाया गया या नहीं, बरामद सामग्री को नियमानुसार सील किया गया या नहीं, नकदी और मोबाइल/DVR को जब्त करने की कोई विधिवत कार्रवाई की गई या नहीं तथा संबंधित व्यक्ति को किन धाराओं के तहत हिरासत में लिया गया।
यदि DVR वास्तव में जब्त किया गया था तो उसकी जब्ती का रिकॉर्ड क्या है? यदि नहीं, तो वह मौके से कैसे गया—यह भी जांच का महत्वपूर्ण सवाल है।
वीडियो ने बढ़ाई पारदर्शिता की मांग
वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मामला सही है या आरोप निराधार हैं, इसका फैसला जांच के बाद ही हो सकता है। लेकिन वीडियो में उठाए गए आरोपों और कार्रवाई के दौरान दिखाई दे रहे लोगों की भूमिका को देखते हुए निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग उठना स्वाभाविक है।
अब सवाल सिर्फ कथित 50 हजार रुपये की डील का नहीं है, बल्कि यह भी है कि आबकारी कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया क्या थी, मौके पर कौन-कौन मौजूद था और सिविल ड्रेस में दिखाई दे रहे लोगों की वास्तविक भूमिका क्या थी?


