सबसे बड़ा सवाल – कौन उठाएगा अवल बंजारे की आंखों के इलाज का खर्च?
शासकीय प्राथमिक शाला, चुंचुनी (आदर्श नगर, कुसमुंडा) के मासूम छात्र अवल बंजारे की बाईं आंख की रोशनी चली गई। घटना स्कूल में हुई, जहां बच्चों की देखरेख की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर थी, वो या तो मौजूद नहीं थे या फिर मौन साधे हुए थे।
अब सवाल ये नहीं है कि अवल के साथ क्या हुआ –
सवाल ये है कि अब कौन उसके साथ खड़ा होगा?
जिसे पिता ने समझा था बुढ़ापे की लाठी, उसका भविष्य अब धुंधला क्यों है?
अवल के पिता अशोक बंजारे, एक गरीब मजदूर हैं।
उन्होंने अपने बेटे को पढ़ा-लिखाकर भविष्य संवारने का सपना देखा था, लेकिन आज वो सपना उसकी आंखों के साथ बुझता नजर आ रहा है।
डॉक्टरों ने कहा – रेटिना डैमेज है, इलाज को दिल्ली ले जाइए।
लेकिन अशोक बंजारे के पास न इतना पैसा है, न कोई सहारा।
अब सवाल उठता है —
क्या इस गरीब परिवार को न्याय मिलेगा?
क्या शासन-प्रशासन अवल के इलाज की पूरी जिम्मेदारी लेगा?
कल जब ये बच्चा बड़ा होगा, क्या उसकी आंखों में उजाले की कोई किरण बाकी बचेगी?
और सबसे अहम — कौन है इसका असल गुनहगार?
कौन है दोषी? एक नहीं, कई सवालों के घेरे में…
स्कूल में शिक्षक मौजूद नहीं थे, CL पर थे।
जो शिक्षक मौजूद माने जा रहे थे – वो स्कूल में थे ही नहीं।
सहायक शिक्षिका को घटना की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने किसी को नहीं बताया।
स्कूल प्रबंधन ने ना तो संकुल अधिकारी को सूचना दी, ना विभाग को।
और शिक्षा विभाग? अब तक न जांच बैठी, न कोई कार्रवाई हुई।
अब इस परिवार को चाहिए – न्याय और सहारा
S n इंडिया न्यूज का मानना है कि:
अवल के इलाज का पूरा खर्च शासन को उठाना चाहिए।
दोषी शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
और सबसे जरूरी – इस मासूम की जिंदगी बचाने के लिए त्वरित मेडिकल सहायता दी जाए।
S n इंडिया न्यूज पूछता है –
कब तक मासूमों की जिंदगी ऐसे लापरवाह सिस्टम की भेंट चढ़ती रहेगी?
कब जागेगा शिक्षा विभाग और शासन?
क्या गरीब की चीख इतनी धीमी हो गई है कि कोई सुन ही नहीं पा रहा?
हम इस मुद्दे को तब तक उठाते रहेंगे, जब तक अवल को उसका हक, उसका इलाज और उसका भविष्य नहीं मिल जाता।
ये सिर्फ एक बच्चे की आंख नहीं गई है — ये पूरे सिस्टम की आंख खोलने का वक्त है।
S n इंडिया न्यूज की आवाज़,



