कोरबा/पोड़ी उपरोड़ा:- कहा जाता है कि जब अधिकारी और नेताओं का संरक्षण प्राप्त हो तो आज के जमाने मे किसी का कुछ नही होता। सरकारी पैसा ही तो है, कौन सा तुम्हारे घर का जा रहा है और तुम क्यों समाजसेवी बने पड़े हो, कौन से पंचायत में ऐसा नही होता, सरपंच चुनाव लड़ने में लाखों खर्च होते है उसकी वापसी कहां से होगी, वगैरह…. वगैरह….! ऐसे अनर्गल तथ्यों के बीच हम ये सोचने को मजबूर हो जाते है कि क्या सच मे जनपद और नेता स्तर पर सरपंच- सचिव को संरक्षण प्राप्त है? क्या संबंधित अधिकारियों को सब पता होता है और ये राशि निकालने से पहले ही उन्हें कमीशन की भेंट चढ़ाई जाती है, क्योंकि अंत मे तो जांच अधिकारी भी जनपद स्तर से ही होंगे। शायद इसीलिए कोरबी (सी) में तत्कालीन सरपंच पुनिता कंवर के बीते पंचवर्षीय कार्यकाल में सचिव मेहरून निशा की मिलीभगत से बेधड़क विकास राशि निकालने और उसके दुरुपयोग किया गया।
छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 49 के अंतर्गत बने प्रावधान अनुसार ग्राम पंचायतों को मूलभूत कार्यों के संपादित करने का दायित्व सौंपा गया है। राज्य शासन द्वारा द्वितीय छत्तीसगढ़ राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा को मान्य करते हुए राज्य के स्वयं के शुद्ध कर राजस्व का 6.15 हिस्सा ग्राम पंचायतों के मध्य उनकी जनसंख्या वर्ष 2011 अनुसार वितरण करने का प्रावधान किया गया है। जिससे प्राप्त राशि से बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करना है। शासन द्वारा इन महत्त्वपूर्ण उद्देश्यों के साथ संचालित योजना कैसे पोड़ी उपरोड़ा ब्लाक के ग्राम पंचायत कोरबी (सी) में दम तोड़ती है, इसका जीता जागता उदाहरण तत्कालीन सरपंच पुनिता कंवर के कार्यकाल में देखने को मिला, जहां की सचिव मेहरून निशा की मिलीभगत से पंचायत को लूट लिया और पंचायत को बुनियादी विकास के लिए शासन द्वारा जारी राशि से जिम्मेदारों ने अपना खूब विकास किया। यहां पेयजल व्यवस्था दुरुस्तीकरण के नाम पर 15वें वित्त आयोग से 18.68 लाख की राशि खर्च बताया गया है, जिसमें से आधी राशि का काम कागजो में कराया गया है। नाली निर्माण और इसके मरम्मत व प्राथमिक शाला अतिरिक्त कक्ष मरम्मत पर 3.54 लाख रुपए मूलभूत एवं 15वें वित्त से आहरण की गई है, जबकि हकीकत यह है कि पूरे पंचायत में कहीं नाली ही नही और अतिरिक्त कक्ष भी आस्तित्व में नही है। वहीं अचानकपुर एवं कोरबी में मार्ग सुधार कार्य, प्राथमिक शाला एवं आंगनबाड़ी भवन मरम्मत व रंगाई- पोताई, पंचायत भवन समतलीकरण पर मूलभूत और 15वें वित्त से 2.38 लाख का खेला किया गया है। इसे लेकर स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत भवन निर्माण के बाद से आज तलक रंगाई- पोताई कार्य नही हुआ है, पंचायत भवन समतलीकरण भी नही कराया गया है, प्रा.शा. व आंगनबाड़ी भवन मरम्मत और रंग- रोगन कार्य तथा मार्ग सुधारीकरण कार्य उन्होंने बीते 5 साल में देखा ही नही है। तत्कालीन सरपंच व सचिव ने पंचायत भवन में रनिंग वाटर सिस्टम स्थापना के नाम पर भी 1.06 लाख की राशि हजम कर दी है। जियोटैग के अनुसार पंचायत भवन में रनिंग वाटर कार्य के नाम पर रिचार्ज बाउचर 18/12/2021 की तिथि में 1 लाख 06 हजार 700 रुपए की राशि 15वें वित्त से निकाली गई है, लेकिन पंचायत भवन में आज तलक रनिंग वाटर का कार्य हुआ ही नही है। इस प्रकार तत्कालीन सरपंच पुनिता कंवर और सचिव मेहरून निशा ने मिलकर 24- 25 लाख की राशि मे मनमाना खेला किया है। बहरहाल पंचायत में हुए तमाम भ्रष्ट्राचार मामले की जनपद व जिला स्तर पर शिकायत करने की बात यहां के ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है।
तत्कालीन सरपंच सचिव व उपसरपंच पर तो सचिव सरपंच- उपसरपंच पर लगा रहे भ्रष्ट्राचार करने के आरोप
कोरबी पंचायत में गढ़े गए लाखों भ्रष्ट्राचार के खेल में पंचायत जिम्मेदार अब एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे है। एक ओर तत्कालीन सरपंच पति व भाजपा नेता रामसिंह कंवर का कहना है कि सचिव मेहरून निशा व तत्कालीन उपसरपंच इंद्र कुमार ने मिलकर पंचायत में तमाम भ्रष्ट्राचार को अंजाम दिया है, तो वहीं दूसरी ओर सचिव मेहरून निशा का कहना है कि तत्कालीन सरपंच और उपसरपंच द्वारा आपसी मिलीभगत से उनको झांसे में लेकर पंचायत विभिन्न मद से राशि आहरण कराया गया, जिनमे से अनेको काम नही कराया है। इस आरोप- प्रत्यारोप में एक बात तो तय है कि पंचायत में भ्रष्ट्राचार हुआ है। लेकिन यह भी तय है कि जिम्मेदार खुद को पाक- साफ बताने के चक्कर में एक दूसरे पर गड़बड़ी करने का ठीकरा फोड़ रहे है। पंचायत में बीते 5 साल में बुनियादी विकास के नाम पर आहरण राशि और कार्यों के उचित जांच की फिलहाल नितांत आवश्यकता है।



