कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र अंतर्गत कापूपहरी गांव में एक युवक की संदिग्ध मौत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। गांव में चर्चा है कि झोलाछाप डॉक्टर के इलाज के बाद युवक की हालत बिगड़ी, लेकिन मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका और कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार कापूपहरी निवासी विनय कंवर (24 वर्ष) खेती-किसानी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था और घर का इकलौता चिराग था। बताया जा रहा है कि विनय को पहले से बीपी (ब्लड प्रेशर) की समस्या थी।
सूत्रों के मुताबिक 6 मार्च को अचानक उसका बीपी बढ़ने लगा, जिसके बाद वह गांव के ही कथित झोलाछाप डॉक्टर तीज राम चंद्राकर के पास सामान्य जांच कराने गया था। बताया जा रहा है कि उस समय युवक ने शराब भी पी रखी थी, इसके बावजूद डॉक्टर द्वारा उसे एक इंजेक्शन लगा दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद विनय की तबीयत अचानक बिगड़ गई। आनन-फानन में परिजन उसे इलाज के लिए न्यू कोरबा अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर गांव में झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम इलाज कर रहे थे तो स्वास्थ्य विभाग अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कई बिना डिग्री के डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस पर ध्यान नहीं देता।
वहीं दूसरी ओर, मृतक के परिजन भी घटना को लेकर स्पष्ट जानकारी देने से बचते नजर आ रहे हैं। गांव के कुछ लोगों का कहना है कि परिजन सही स्थिति बताने के बजाय बात को घुमाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे पूरे मामले पर और भी संदेह पैदा हो रहा है।
अब ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, यह स्पष्ट किया जाए कि युवक को कौन-सा इंजेक्शन लगाया गया था और झोलाछाप डॉक्टर पर क्या कार्रवाई की जाएगी। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की भी जांच होनी चाहिए।
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