बांकीमोंगरा।* उपनगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा और आस-पास के इलाकों में इन दिनों कबाड़ का अवैध कारोबार बड़े पैमाने पर, धड़ल्ले से चल रहा है। क्षेत्र में सक्रिय कबाड़ माफिया बिना किसी डर के शासकीय संपत्तियों, खदानों के लोहे और अन्य कीमती सामानों की अवैध खरीदी-बिक्री में जुटे हुए हैं। हैरत की बात यह है कि इस पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी मीडिया कर्मियों द्वारा बांकीमोंगरा पुलिस को दिए जाने के बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
पुलिस की इस निष्क्रियता ने अब क्षेत्र में गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
### 🚨 मीडिया की सजगता, पुलिस की चुप्पी
क्षेत्र में सक्रिय सजग मीडिया कर्मियों ने जब इस अवैध कारोबार को करीब से देखा, तो इसकी पूरी जानकारी और पुख्ता इनपुट बांकीमोंगरा थाना प्रभारी और को दी। उम्मीद थी कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम तत्काल छापेमारी करेगी और इस अवैध धंधे पर नकेल कसेगी। लेकिन हकीकत इसके उलट रही। दिन बीत जाने के बाद भी कबाड़ के अड्डों पर पुलिस की कोई हलचल देखने को नहीं मिली, जिससे कबाड़ियों के हौसले और बुलंद हो गए हैं।
### ❓ खड़े हो रहे हैं कई गंभीर सवाल
पुलिस की इस रहस्यमयी खामोशी के बाद अब आम जनता और गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं:
* *क्या कबाड़ माफिया और थाने के बीच कोई ‘सेटिंग’ है?* जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस अवैध कारोबार को स्थानीय स्तर पर मूक सहमति मिली हुई है?
* *कार्रवाई से क्यों बच रही है पुलिस?* जब मीडिया सीधे साक्ष्य और जानकारी दे रहा है, तो आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो पुलिस के हाथ कबाड़ियों के गिरेबान तक पहुंचने से रोक रही है?
* *चोरी की वारदातों को बढ़ावा:* कबाड़ का काम जोरों से चलने का सीधा असर क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ रहा है। लोहे और तांबे के चक्कर में खदानों की संपत्तियों के साथ-साथ आम नागरिकों के घरों और दुकानों में भी चोरियां बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
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