*कोरबा।* सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत गरीबों को बांटने वाला सरकारी राशन (PDS का चावल) अब खुलेआम बाजारों में कौड़ियों के दाम बिक रहा है। ताजा मामला बुधवारी बाजार का है, जहां रोज दुकान लगती है सरकारी चावल की अवैध ढेरी लगाकर बड़े पैमाने पर खरीद-बिक्री का खेल चल रहा है।
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवारी बाजार में लगने वाली एक इस अवैध कारोबार का मुख्य अड्डा बन चुकी है। ग्रामीणों और राशन कार्डधारियों से कम दामों में सरकारी चावल खरीदा जाता है और फिर उसे इस दुकान के माध्यम से ऊंचे दामों पर खपाया या रीसाइकल किया जा रहा है। खुलेआम लगने वाली इन ढेरियों पर न तो स्थानीय प्रशासन की नजर है और न ही खाद्य विभाग की।
### *प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल*
गरीबों के निवाले पर डाका डालने वाले इस सिंडिकेट के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई खौफ नहीं है। सार्वजनिक स्थल पर इस तरह का अवैध कारोबार होना स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इस बात की भनक नहीं है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं?
### *कलेक्टर और खाद्य विभाग से तुरंत छापेमारी की मांग*
यह सीधे तौर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) का उल्लंघन है। स्थानीय जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि:
* जिला प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम *बुधवारी बाजार दुकान पर तत्काल औचक निरीक्षण (Surprise Raid) करे*।
सीसीटीवी फुटेज और मौके की जांच कर अवैध चावल जब्त किया जाए।
* इस काले कारोबार में शामिल बिचौलियों और दुकान संचालक के खिलाफ *FIR दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई* की जाए






