कोरबा (छत्तीसगढ़): जिले के पौड़ी उपरोड़ा ब्लॉक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के अंतर्गत राशन दुकान संचालकों के सब्र का बांध अब टूट चुका है। संचालकों ने सीधे तौर पर नागरिक आपूर्ति निगम (NAAN) के प्रभारी जिला प्रबंधक (DM) बजरंग कसेर जब से प्रभारी बने है कोई भी कार्य में रूचि नहीं ले रहे है और लेखा वर्ग होने के कारण उनको कोई प्रशासनिक अनुभव भी नहीं है लगातार उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। संचालकों का कहना है कि नान (NAAN) के प्रभारी डीएम श्री कसेर के उदासीन रवैये के कारण पूरे ब्लॉक के PDS संचालक दर-दर भटकने को मजबूर हैं, जिससे क्षेत्र की गरीब जनता को राशन वितरण करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
1. दूसरे कामों में ज्यादा मेहनत करते नजर आ रहे है जैसे बन्दर के हाथ में उस्तारा दे दिया हो से कमीशन गायब, दाने-दाने को मोहताज हुए संचालक
संचालकों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पिछले जब से प्रभारी लिए है दुकानदार को कल आना परशो आना एक हफ्ते बाद आना अभी बिजी हूँ दूसरा काम कर रहा हूँ जिससे दुकानदार अपने हक की कमीशन राशि समय पर भुगतान नहीं मिली है। लंबे समय से कमीशन का भुगतान न होने के कारण उनके सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बिना किसी वित्तीय सहयोग के PDS दुकानों का संचालन करना अब पूरी तरह से असंभव होता जा रहा है। दुकानों का किराया, बिजली बिल और हमाली का खर्च उठाना भी अब संचालकों के बस से बाहर हो चुका है।
2. ‘नान’ (NAAN) से ही मिल रहा कम तौल, उल्टा संचालकों पर बन रहे झूठे प्रकरण
संचालकों ने नान (NAAN) के गोदामों से होने वाली गड़बड़ी का भी बड़ा पर्दाफाश किया है। उनका आरोप है कि:
खुद नान (NAAN) के गोदामों से उन्हें सही तौल कर चावल नहीं दिया जाता। प्रति बोरी वजन कम रहता है।
जब दुकानों में चावल कम पड़ता है, तो उच्च अधिकारी जमीनी हकीकत जाने बिना उल्टा संचालकों पर ही चावल की कमी का ठीकरा फोड़कर प्रकरण (केस) दर्ज कर देते हैं।
इस दोहरी मार से ईमानदार संचालक मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।
3. जब से श्री बजरंग कसेर ने जिले का चार्ज किया है सभी काम ठप पड़ गए है दबाई बैठी है सरकार बारदाने की राशि!
लापरवाही की हद यहीं खत्म नहीं होती। संचालकों ने बताया कि पिछले कुछ माह से उन्हें बारदाने (बोरे) की राशि का भुगतान के लिए निवेदन किया गया है। किन्तु वाह ध्यान नहीं दे पा रहे है नियमतः हर साल बारदाने की राशि का सेटलमेंट हो जाना चाहिए, लेकिन पौड़ी उपरोड़ा ब्लॉक में पिछले सालों से यह करोड़ों का फंड अटका हुआ है, जिसका हिसाब-किताब श्री कसेर प्रभारी डी एम को देना चाहिए लेकिन नहीं दिया जा रहा है।
मुख्य बिंदु जो तुरंत जांच के दायरे में आने चाहिए:
प्रभारी डीएम बजरंग कसेर की भूमिका: आखिर क्यों प्रभारी अधिकारी के रहते हुए PDS संचालकों की जायज मांगें अधर में लटकी हैं?
कमीशन और बारदाना राशि की रोके रखने की वजह: कुछ दुकानदार बताते है की उनके कई बार शिकायत किया जा चूका है किन्तु श्री कसेर को जिला खाद्य अधिकारी द्वारा संरक्षण दिया जा रहा है सालो से कमीशन बारदाना राशि का बजट आखिर कहाँ अटका है?
कम तौल का खेल: नान (NAAN) गोदामों से तौल में होने वाली हेराफेरी की उच्च स्तरीय जांच क्यों नहीं की जा रही?
तुरंत संज्ञान लेने की आवश्यकता
PDS संचालक क्षेत्र की गरीब और जरूरतमंद आबादी तक सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुँचाने वाली मुख्य कड़ी हैं। यदि पौड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के इन संचालकों की आर्थिक और प्रशासनिक समस्याओं का तुरंत निराकरण नहीं किया गया, तो पूरे ब्लॉक में राशन वितरण व्यवस्था ध्वस्त हो सकती है।
अब देखना यह है कि इस खबर के बाद जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के उच्च अधिकारी इस गंभीर भ्रष्टाचार और लापरवाही पर क्या लेखा वर्ग के श्री बजरंग कसेरा पर क्या एक्शन लेते हैं, या फिर प्रभारी डीएम के भरोसे इस संवेदनशील व्यवस्था को ऐसे ही राम-भरोसे छोड़ दिया जाएगा।
SN इंडिया न्यूज








