रांची।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो झारखंड की सड़कों की एक ऐसी भयावह तस्वीर बयां कर रहा है, जिसे देखकर किसी की भी रूह कांप जाए। एक जीप, क्षमता से चार गुना ज्यादा सवारियां, और प्रशासन की नाक के नीचे कानून की उड़ती धज्जियां। न कोई रोक, न कोई टोक, न किसी कार्रवाई का डर।
सड़क सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों और विज्ञापनों के बीच, यह वीडियो झारखंड सरकार और परिवहन विभाग की गहरी नींद को उजागर करने के लिए काफी है।
⚠️ मौत का सफर: न यातायात के नियम, न जान की परवाह
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे एक छोटे से वाहन में भेड़-बकरियों की तरह इंसानों को लादा गया है। लोग पायदान पर लटके हैं, कुछ बोनट और छत पर बैठे हैं।
नियमों की धज्जियां ओवरलोडिंग के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त।
प्रशासन का डर शून्य:* चालकों को न तो भारी जुर्माने का डर है और न ही पुलिसिया कार्रवाई का।
दांव पर मासूम जिंदगियांइस सफर में हल्की सी भी चूक दर्जनों परिवारों को उम्र भर का दर्द दे सकती है।
सरकार और प्रशासन से सीधे सवाल
क्या झारखंड का परिवहन विभाग सिर्फ कागजों पर चल रहा है? सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की चौकसी आखिरकार कहां गायब है?
> **बड़ा सवाल:जब हर मोड़ पर सीसीटीवी और चेकिंग के दावे किए जाते हैं, तो ऐसे ‘मौत के वाहन’ बेखौफ होकर हाईवे और मुख्य सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं? क्या विभाग को किसी बड़ी दुर्घटना और मासूमों की जान जाने का इंतजार है, जिसके बाद सिर्फ ‘मुआवजे’ का मरहम लगाया जा सके?
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अब तो जागिए सरकार!
यह वीडियो सिर्फ एक वाहन की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह राज्य की लचर यातायात व्यवस्था का खुला प्रमाण है। सरकार को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए:
1. कड़ी कार्रवाई:ओवरलोडिंग करने वाले वाहन मालिकों और चालकों के लाइसेंस तुरंत रद्द हों।
2. सघन चेकिंग अभियान: राज्य के ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में औचक निरीक्षण बढ़ाया जाए।
3. जवाबदेही तय हो: जिस इलाके में ऐसे वाहन चलते पाए जाएं, वहां के स्थानीय ट्रैफिक प्रभारी और आरटीओ (RTO) की जवाबदेही तय की जाए।
जनता अपनी मजबूरी या जागरूकता की कमी के कारण जान जोखिम में डाल सकती है, लेकिन सरकार और प्रशासन अपनी आंखें बंद नहीं रख सकते। मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री जी, इस वीडियो को देखिए और इससे पहले कि कोई मातम पसरे, अपनी कुंभकर्णी नींद से जागिए!



