कोरबा। कोरबा जिला सहित शहर क्षेत्र में रेत चोरों की सक्रियता कम होने का नाम नहीं ले रही है। अभी खनन पर प्रतिबंध होने के बावजूद नदी-घाटों में ट्रैक्टर उतार कर रेत का अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण का कार्य चल रहा है।
शहर क्षेत्र के भीतर सीतामढ़ी घाट जहां रेत चोरी का हॉटस्पॉट बना हुआ है वहीं शहर के भीतर से होते हुए गीली रेत का परिवहन इस बात का प्रमाण है कि नदियों से सीधे रेत खोदकर जगह-जगह आपूर्ति की जा रही है/अवैध भंडारण में डंप कराए जा रहे हैं। सीतामणी, राताखार, बरमपुर से जिस पैमाने पर रेत की चोरी, अवैध परिवहन और भंडारण हो रहा है, कार्यवाही उस पैमाने पर काफी कमजोर देखने को मिल रही है। हालांकि थोड़ी-थोड़ी कार्रवाई करके एक बड़ा आंकड़ा जरूर प्रस्तुत किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता इससे परे है।
खनिज उड़न दस्ता टीम के द्वारा कहने को ड्रोन के माध्यम से निगरानी शुरू की गई लेकिन यह प्रायोगिक तौर पर एक ही दिन देखने को मिला। इस पर यह विचारणीय रहा कि ड्रोन के माध्यम से जिसका जेसीबी, टिप्पर और अन्य वाहन पकड़े गए उनका नाम तक उजागर नहीं किया गया। इस तरह से और भी जितने मामले खनिज अमले ने हाल- फिलहाल पकड़े हैं, उनमें सिर्फ स्थान का जिक्र किया गया है जबकि अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में जो लोग संलिप्त हैं उनका नाम भी उजागर होना चाहिए। उन पर कितना जुर्माना, किस तरह की कार्रवाई की गई यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए जो कि नहीं किया गया है।
पूर्व में रेत की चोरी में संलिप्त लोगों के विरुद्ध थाना में अपराध भी दर्ज कराए गए लेकिन इसके बाद इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज कराने में कोई रुचि नहीं ली जा रही है।
👉🏻 सुबह से रात तक निकल रही रेत
सूत्र बताते हैं कि सीतामढ़ी रेट घाट में सुबह से लेकर शाम तक, रात के अंधेरे में भी मानव बल लगाकर अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है जबकि यहां पर खनिज अमले की तैनाती की गई है खनिज अमला भी इन्हें रोक नहीं पा रहा है। आखिर प्रशासनिक मजबूरी किन कारणों से बनी हुई है कि वह रेत माफियाओं पर जरूरी सख्ती नहीं दिखा पा रहे हैं।
👉🏻 यहां सुशासन कि सख्ती फेल..!
अवैध गतिविधियों और कार्रवाई में संलिप्त लोगों पर जहां सुशासन की सरकार द्वारा कार्रवाई करने का दावा भाजपा के पदाधिकारी और नेतागण करते नहीं थकते वहीं रेत चोरों के मामले में इनके द्वारा किसी तरह की सख्ती न करना और ना कोई मांग की जा रही है। अवैध कारोबार के मामले में भाजपा नेताओं और पदाधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
👉🏻 इन पर चले जेसीबी,मिलीभगत का तंत्र तलाशें
लोगों के बीच चर्चा तो इस बात की भी है कि जिस तरह से जिला प्रशासन और भाजपा की सुशासन सरकार अवैध कबाड़, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के अवैध निर्माण पर शिकंजा कस रही है, उन्हें ढहाने का कार्य कर रही है, वैसे ही रेत माफियाओं के भी अवैध निर्माण का चिन्हांकन करते हुए उन पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। रेत माफियाओं के द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है, उस पर भी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को जांच-पड़ताल कर कार्रवाई करनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि आखिर इन रेत माफिया को संरक्षण और मनोबल किसके द्वारा प्रदान किया जा रहा है? क्या विभागीय महकमे से जुड़े लोग उनके लिए मुखबिरी कर रहे हैं?आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि जब खनिज का अमला कार्रवाई करने के लिए दफ्तर से निकलता है तो उसके पहुंचने से पहले यह लोग मैदान साफ करके वहां से निकल जाते हैं, फिर अमले के हाथ कुछ नहीं लगता।
शहर क्षेत्र के भीतर सीतामढ़ी घाट जहां रेत चोरी का हॉटस्पॉट बना हुआ है वहीं शहर के भीतर से होते हुए गीली रेत का परिवहन इस बात का प्रमाण है कि नदियों से सीधे रेत खोदकर जगह-जगह आपूर्ति की जा रही है/अवैध भंडारण में डंप कराए जा रहे हैं। सीतामणी, राताखार, बरमपुर से जिस पैमाने पर रेत की चोरी, अवैध परिवहन और भंडारण हो रहा है, कार्यवाही उस पैमाने पर काफी कमजोर देखने को मिल रही है। हालांकि थोड़ी-थोड़ी कार्रवाई करके एक बड़ा आंकड़ा जरूर प्रस्तुत किया जा रहा है लेकिन वास्तविकता इससे परे है।
खनिज उड़न दस्ता टीम के द्वारा कहने को ड्रोन के माध्यम से निगरानी शुरू की गई लेकिन यह प्रायोगिक तौर पर एक ही दिन देखने को मिला। इस पर यह विचारणीय रहा कि ड्रोन के माध्यम से जिसका जेसीबी, टिप्पर और अन्य वाहन पकड़े गए उनका नाम तक उजागर नहीं किया गया। इस तरह से और भी जितने मामले खनिज अमले ने हाल- फिलहाल पकड़े हैं, उनमें सिर्फ स्थान का जिक्र किया गया है जबकि अवैध खनन, परिवहन और भंडारण में जो लोग संलिप्त हैं उनका नाम भी उजागर होना चाहिए। उन पर कितना जुर्माना, किस तरह की कार्रवाई की गई यह भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए जो कि नहीं किया गया है।
पूर्व में रेत की चोरी में संलिप्त लोगों के विरुद्ध थाना में अपराध भी दर्ज कराए गए लेकिन इसके बाद इस तरह के मामलों में एफआईआर दर्ज कराने में कोई रुचि नहीं ली जा रही है।
👉🏻 सुबह से रात तक निकल रही रेत
सूत्र बताते हैं कि सीतामढ़ी रेट घाट में सुबह से लेकर शाम तक, रात के अंधेरे में भी मानव बल लगाकर अवैध खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है जबकि यहां पर खनिज अमले की तैनाती की गई है खनिज अमला भी इन्हें रोक नहीं पा रहा है। आखिर प्रशासनिक मजबूरी किन कारणों से बनी हुई है कि वह रेत माफियाओं पर जरूरी सख्ती नहीं दिखा पा रहे हैं।
👉🏻 यहां सुशासन कि सख्ती फेल..!
अवैध गतिविधियों और कार्रवाई में संलिप्त लोगों पर जहां सुशासन की सरकार द्वारा कार्रवाई करने का दावा भाजपा के पदाधिकारी और नेतागण करते नहीं थकते वहीं रेत चोरों के मामले में इनके द्वारा किसी तरह की सख्ती न करना और ना कोई मांग की जा रही है। अवैध कारोबार के मामले में भाजपा नेताओं और पदाधिकारी की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
👉🏻 इन पर चले जेसीबी,मिलीभगत का तंत्र तलाशें
लोगों के बीच चर्चा तो इस बात की भी है कि जिस तरह से जिला प्रशासन और भाजपा की सुशासन सरकार अवैध कबाड़, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के अवैध निर्माण पर शिकंजा कस रही है, उन्हें ढहाने का कार्य कर रही है, वैसे ही रेत माफियाओं के भी अवैध निर्माण का चिन्हांकन करते हुए उन पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। रेत माफियाओं के द्वारा आय से अधिक संपत्ति अर्जित की गई है, उस पर भी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो को जांच-पड़ताल कर कार्रवाई करनी चाहिए। यह भी जांच का विषय है कि आखिर इन रेत माफिया को संरक्षण और मनोबल किसके द्वारा प्रदान किया जा रहा है? क्या विभागीय महकमे से जुड़े लोग उनके लिए मुखबिरी कर रहे हैं?आखिर ऐसी कौन सी वजह है कि जब खनिज का अमला कार्रवाई करने के लिए दफ्तर से निकलता है तो उसके पहुंचने से पहले यह लोग मैदान साफ करके वहां से निकल जाते हैं, फिर अमले के हाथ कुछ नहीं लगता।



