कोरबा/पाली:- बरसाती मौसम के बीच जुलाई का महीना और छत्तीसगढ़ के शिमला कहे जाने वाला चैतुरगढ का संगम यहां पहुँचने वाले पर्यटकों व दर्शनिकों को मंत्रमुग्ध कर रहा है। कोरबा जिले से लगभग 90 किलोमीटर दूर पाली विकासखण्ड में स्थित तीन हजार फीट ऊंची पहाड़ी पर विराजमान मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर इन दिनों कोहरे और हरियाली की चादर में लिपटा हुआ मनमोहक दिख रहा है।
पाली ब्लाक मुख्यालय से 32 किलोमीटर की दूरी पर स्थित चैतुरगढ में मां के दर्शन के साथ प्रकृति का आनंद से बड़ा उपहार वर्तमान और क्या हो सकता है। तीन हजार फीट की पहाड़ी पर विराजमान माता के मंदिर की वर्तमान तस्वीरें खुद गवाही दे रही है कि क्यों जुलाई में चैतुरगढ दर्शानार्थियों को सबसे ज्यादा आकर्षित कर रहा है। पहली तस्वीर पर कोहरे में डूबी दिव्यता देखी जा सकती है, जहां भोर का अद्भुत नजारा है, घना कोहरा मंदिर के शिखर को छू रहा है, पत्थरों से बना प्राचीन मंदिर धुंध में किसी स्वर्ग लोक की तरह दिख रहा है। सामने लहराते लाल ध्वज और सीढ़ियों पर विराजे शेर मानो मां के द्वारपाल बनकर खड़े हैं। दूसरी तस्वीर में हरियाली की कालीन दिख रही है, जिसमे भोर के बाद धीरे- धीरे कोहरा छंटता है और सामने आता है मंदिर सहित चारो ओर हरा- भरा मनोरम दृश्य। घने जंगलों और विहंगम पहाड़ियों के बीच मां का मंदिर किसी पन्ने पर उकेरी तस्वीर लगता है। चारो तरफ फैली हरियाली, पेड़ों की कतारें और खुला आसमान मानसून में चैतुरगढ को सबसे खूबसूरत बना रहे हैं। उक्त नजारे को देखकर लगता है जैसे बादलों के बीच मां स्वयं विराजमान हो। वर्तमान मौसम में यहां पहुँचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को हरियाली लिए घने वादियां, झरने, घाटियां जैसे प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित नजारा जीवन भर याद रहता है। तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर तक पहुँचने के लिए घुमावदार साहसिक रैम्प थकान के साथ रोमांच पैदा करते हैं। इस ऐतिहासिक दर्शनिक स्थल को छत्तीसगढ़ का शिमला भी कहा जाता है, क्योंकि यहां भीषण गर्मी के मौसम में भी ठंडी हवा के साथ 30- 32 डिग्री तापमान रहता है। सावन- भादो में यहां पर्यटकों की भीड़ दोगुनी हो जाती है और लोग वीकेंड पर आते है। यहां रुकने के लिए वन विभाग का रेस्ट हाउस भी उपलब्ध है। वर्तमान यहां पहुँचने वाले लोग कहते हैं जुलाई का चैतुरगढ सिर्फ दर्शनिक स्थल नही, एक अनुभव है, जहां हाल के दिनों में अनुपम नजारा, प्राचीन शिल्प, विहंगम घाटी का दृश्य मन मोह लेता है तथा जैसे बादलों में मंदिर और पैरों में हरियाली आ जाती है। यहां चैत्र एवं शारदीय क्वांर महीने में माता के आस्था में मनोकामना दीप प्रज्ज्वलित किये जाते है, साथ ही नौ दिवसीय दर्शनिक मेला भी लगता है, जहां लोग दूर- दूर से मां महिषासुर मर्दिनी दर्शन के लिए आते हैं और अपनी मुरादे मांगते हैं।


