तरदा
शासन की गरीब कल्याण” योजनाओं पर मैदानी स्तर के जिम्मेदार अधिकारी और राशन माफिया किस कदर पलीता लगा रहे हैं, इसकी एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है ग्राम पंचायत तरदा की शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी क्रमांक: 552002021) में इन दिनों गरीबों को अनाज नहीं, बल्कि बीमारी बांटी जा रही है। दुकान से हितग्राहियों को जो चावल वितरित किया जा रहा है वह पूरी तरह कीड़ेयुक्त इल्ली और घुन से सड़ा हुआ है।
तस्वीरें और हालात इतने बदतर हैं कि जिस चावल को मवेशी भी न सूंघें, उसे मजबूरन गरीब ग्रामीण अपने बच्चों का पेट भरने के लिए घर ले जाने को मजबूर हैं।
तमाशा देख रहे जिम्मेदार एसी कमरों से बाहर नहीं निकल रहे साहब
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल खाद्य विभाग और स्थानीय जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है।
चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति आखिर गोदाम से लेकर दुकान तक इस सड़े हुए चावल की सप्लाई कैसे हो गई क्या क्वालिटी कंट्रोल इंस्पेक्टर सिर्फ कागजों पर दस्तखत करने के लिए तनख्वाह ले रहे हैं
मजबूरी का फायदा गरीब हितग्राही जब शिकायत करते हैं तो उन्हें लेना है तो लो, नहीं तो खाली हाथ जाओ’ का टका सा जवाब दे दिया जाता है। अधिकारियों की इस घोर लापरवाही का खामियाजा सीधे तौर पर मासूम बच्चों और गरीब परिवारों की सेहत को भुगतना पड़ रहा है।
अब तो जांच की आंच बड़े साहबों तक पहुंचनी ही चाहिए
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे गरीब जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ और आपराधिक कृत्य है
> जनता की पुरजोर मांग
> इस उचित मूल्य दुकान के आवंटन और गोदाम से सप्लाई करने वाले नोडल अधिकारियों पर तत्काल उच्च स्तरीय जांच (High-Level Inquiry) बैठाई जाए सिर्फ राशन दुकान संचालक को बलि का बकरा बनाकर मामले को रफा-दफा न किया जाए, बल्कि उन बड़े अधिकारियों को सस्पेंड किया जाए जिन्होंने इस सड़े चावल को पास कर गरीबों की थाली तक पहुंचने दिया
अब देखना यह होगा कि इस खबर के बाद भी जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के आला अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर ‘जांच का भरोसा’ देकर इस गंभीर घपले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है
बने रहिए हमारी अगली ख़बर में



