कोरबा/पाली:- 18 अगस्त 2016 का वो दिन, जब पाली ब्लाक के चनवारीपारा गांव में मातम था, पर गर्व भी था इस बात का कि उनका बेटा दुश्मनों से लोहा लेते- लेते शहीद हुआ। आज उसी वीर सपूत आदित्य शरण प्रताप सिंह की 10 वीं पुण्यतिथि है।
मूलतः कोरबा जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम चनवारीपारा निवासी आदित्य का चयन वर्ष 2008 में पुलिस सेवा के लिए हुआ था और वे दंतेवाड़ा में (डीआरजी) डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड में आरक्षक के पद पर तैनात थे। गत 17 अगस्त 2016 का वो दिन जब नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन चल रहा था और आदित्य सबसे आगे थे। जहां नक्सलियों के मध्य ताबड़तोड़ फायरिंग के दौरान दो गोलियां सीधे उनके सीने को चीरते हुए निकल गई तथा एक गोली शरीर मे ही धंस गई। लेकिन शहीद ने आखिरी सांस तक मोर्चा नही छोड़ा। गंभीर हालत में उन्हें रायपुर रिफर किया गया। लेकिन 18 अगस्त 2016 की सुबह वो वीर हंसते- हंसते देश के लिए शहीद हो गए। उसी शाम करीब 5 बजे जब तिरंगे में लिपटा उनका पार्थिव शरीर चनवारीपारा पहुँचा तो पूरे गांव में चीख- पुकार मच गई। घर मे मातम- कोहराम और गलियों में भीड़ तथा हर आंख नम थी। परिजनों और गांव वालों ने फैसला लिया कि हमारे लाल का अंतिम संस्कार दूसरे दिन होगा। जहां दूसरे दिन गृहग्राम के प्राइमरी स्कूल परिसर में पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उस दिन वहां जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधिगण और सैकडों ग्रामीण थे और हर कोई कह रहा था- आज हमारा सिर गर्व से ऊंचा है, क्योंकि इस मिट्टी ने एक शहीद दिया है। साथी और गांव वाले आज भी उन्हें याद करते हैं और आज उनकी पुण्यतिथि पर वही पुराने किस्से, वहीं आंसू और वही गर्व है तथा कहते नही थकते कि वीर जांबाज आदित्य बहुत मिलनसार और सहयोगी स्वभाव के थे, किसी की मदद के लिए हमेशा पहले खड़े रहते थे। शहीद आदित्य के छोटे भाई तपेन्द्र शरण प्रताप सिंह जो आज अनुकंपा नियुक्ति में आरक्षक पद पर कोरबा जिले में पदस्थ हैं और कहते है- 9 साल बीत गया, लेकिन मेरा शहीद आदित्य भैया मेरे लिए प्रेरणा हैं। जो देश के लिए मिट गया, उनके लिए आज मेरे भी सीने में गोली के निशान और दिल मे देशभक्ति का जज्बा है।
पाली क्षेत्र के इस वीर सपूत को शत- शत नमन और मेरा सलाम।































