कोरबा। कुसमुंडा एसईसीएल कोयला खदान के नीलकंठ कंपनी में लगातार एक के बाद एक हादसा थमने का नाम ही नहीं ले रही है। इस कंपनी में जान और माल की हानि होने की घटनाएं लगातार देखने को मिल रही है। जिससे कि जिम्मेदार एवं जवाबदार अधिकारियों के द्वारा कुसमुंडा कोयला खदान में सुरक्षा व्यवस्थाओं को लेकर उनके कार्य शैलियों की पोल खोल कर रख दी है।
खबर का नहीं हो रहा असर
बता दें कि कुसमुंडा कोयला खदान के आउटसोर्सिंग नीलकंठ कंपनी में कल मंगलवार को स्लाइड डंप होने से दो डंफर गहरी खाई में जा गिरे, वही आज बुधवार, दिनांक 08.04.2026 एक और भारी भरकम डंपर घर गड्ढे में जा घुसी। जानकारी मिली है कि वाहन चालक सुरक्षित है और इन दोनों मामलों में किसी भी प्रकार के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है परंतु कुसमुंडा कोयला खदान में ठेका कर्मियों की सेफ्टी सुरक्षाओं और लचर व्यवस्थाओं की खबर सुर्खियों पर है।
साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड एसईसीएल कुसमुंडा कोयला खदान
भारत रत्न से सम्मानित एसईसीएल एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान कुसमुंडा में प्रतिवर्ष देश के विकास के लिए लाखों टन कोयला उत्पादन का कार्य प्रगति पर है परंतु इस कोयला खदान में कार्यरत कर्मचारियों तथा ठेका मजदूरों से संबंधित सेफ्टी सुरक्षा और खदान से संबंधित सुरक्षा व्यवस्थाओं की डिग्री अनुमानित 10 परसेंट है। खदान की सड़कों में पानी का छिड़काव समय पर नहीं किया जाता। जिससे कि अत्यधिक कोयला उत्पादन करने तथा भारी वाहन चलने से कुसमुंडा कोयला खदान और आसपास के क्षेत्र का माहौल प्रदूषण से गमगीन हो जाता है। खदान के भीतर अन्यथा संबंधित क्षेत्र में सांस लेना दुर्लभ है। शाम होते ही खदान की सड़कें प्रदूषण से लबालब रहती है भारी भरकम वहां चलने से धूल, डस्ट, मिट्टी अत्यधिक उड़ती है जिससे कि समूचा क्षेत्र प्रदूषण से प्रभावित होकर आवागमन कर रहे भारी भरकम वाहन के चालकों को सड़के दिखाई तक नहीं देती जिससे कि खदान में चल रही वाहनों में आमने-सामने टक्कर व दुर्घटनाएं होने की आशंकाएं लगातार बनी रहती है।
मानव जीवन के स्वास्थ्य पर गंभीर असर और बे लगाम कुसमुंडा एसईसीएल
गरीब लोगों के जमीनों को हड़प कर कोयला खदान बनाने की दिली तमन्नाएं तथा आम लोगों और मजदूरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर कोयला उत्पादन के कार्य को अंजाम दिया जा रहा। लाखों लोगों की बददुआएं लेकर एसईसीएल और उसके जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा खुद के महल को सजाया जा रहा।


