क्या इथेनॉल पर सरकार और ऑटो कंपनियां जनता की सभी चिंताओं का जवाब देंगी?देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। एक ओर सरकार का कहना है कि इससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को फायदा मिलेगा और प्रदूषण घटेगा। वहीं दूसरी ओर कई वाहन मालिक दावा कर रहे हैं कि उन्हें माइलेज, इंजन की परफॉर्मेंस और रखरखाव को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
हाल ही में सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन सुरक्षित है और इससे वाहनों को कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन इसके बावजूद आम लोगों के मन में कई सवाल अभी भी बने हुए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इथेनॉल से किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या नहीं होती, तो क्या वाहन निर्माता कंपनियां और इंश्योरेंस कंपनियां लिखित गारंटी देने को तैयार हैं कि इथेनॉल ईंधन के कारण इंजन, फ्यूल सिस्टम या अन्य पार्ट्स में खराबी आने पर पूरा खर्च वे उठाएंगी? यदि सरकार और कंपनियां अपने दावों पर पूरी तरह आश्वस्त हैं, तो ऐसी स्पष्ट गारंटी से उपभोक्ताओं का भरोसा और मजबूत हो सकता है।
कई वाहन मालिकों का कहना है कि नई ईंधन नीति लागू होने के बाद उन्हें पहले जैसी संतुष्टि नहीं मिल रही। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि सभी वाहनों की तकनीक एक जैसी नहीं होती और पुराने मॉडलों में निर्माता की सलाह का पालन करना जरूरी है।
जनता यह भी चाहती है कि यदि किसी नीति से करोड़ों वाहन मालिक प्रभावित हो सकते हैं, तो उसके प्रभावों की पूरी जानकारी, स्वतंत्र परीक्षणों की रिपोर्ट और उपभोक्ताओं के अधिकारों को भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।
सरकार, ऑटोमोबाइल कंपनियों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच पारदर्शिता बढ़ेगी तो लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। किसी भी नई तकनीक या नीति की सफलता तभी संभव है, जब आम नागरिकों की शंकाओं का तथ्यों और जवाबदेही के साथ समाधान किया जाए।


