कोरबा। जिले में कानून व्यवस्था अब मजाक बनती नजर आ रही है। सीएसईबी चौकी से महज 150 मीटर की दूरी पर खड़ी स्कॉर्पियो का शीशा आधी रात को बेखौफ होकर तोड़ा जाता है, और पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो जाती है—लेकिन पुलिस की मौजूदगी कहीं नजर नहीं आती। ऐसा लगता है मानो अपराधियों को खुली छूट मिल गई हो कि “चौकी के पास ही स्टंट करो, कोई रोकने वाला नहीं।”
सबसे दिलचस्प बात ये है कि सोशल मीडिया पर आरोपी की पहचान साहिल त्रिपाठी के रूप हो रही है,,,उसके कथित रसूख की चर्चा तेजी से हो रही है और उसका “राजनीतिक कनेक्शन” भी मिनटों में निकाल लिया, लेकिन पुलिस अब भी आधिकारिक पुष्टि के मूड में नहीं दिख रही—शायद पहले वीडियो का HD वर्जन आने का इंतजार हो रहा है। लेकिन पुलिस अब भी “जांच जारी है” का रटा-रटाया बयान देने की तैयारी में है। सवाल ये उठता है कि जब सबकुछ कैमरे में साफ दिख रहा है, तो कार्रवाई में देरी क्यों?
स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि पुलिस गश्त के दावे सिर्फ कागजों और प्रेस नोट तक सीमित हैं। हकीकत में रात के समय शहर “भगवान भरोसे” चलता है। अगर चौकी के सामने ही ऐसी घटना हो जाए, तो बाकी इलाकों की सुरक्षा का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
लोगों का यह भी आरोप है कि क्षेत्र में पहले भी कई घटनाएं हुईं, लेकिन सख्त कार्रवाई के अभाव में असामाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। अब अपराधी डरते नहीं, बल्कि कैमरे में आने को भी तैयार हैं—क्योंकि उन्हें पता है कि नतीजा कुछ खास नहीं निकलने वाला।
फिलहाल पुलिस का आधिकारिक बयान आना बाकी है, लेकिन जनता का गुस्सा साफ है—“अगर यही हाल रहा, तो अगली खबर शायद सिर्फ शीशा टूटने की नहीं, बल्कि भरोसा टूटने की होगी।”






