कोरबा/पाली:- मोबाइल उपभोक्ताओं के लिए बेहतर नेटवर्क और फास्ट नेट का भरोसा देने वाली जिओ आज खुद पाली ब्लॉक में उपभोक्ताओं को हलाकान कर रही है और कभी नेटवर्क गायब, कभी नेट स्लो की समस्या से रोजाना दर्जनों काम बाधित हो रहे हैं। ऐसे में यदि जिओ नेटवर्क का मुख्यालय में यह हाल है तो ग्रामीण क्षेत्रों में क्या हालात होंगे, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
पाली ब्लॉक में सबसे ज्यादा उपभोक्ता जिओ के हैं। इसके बाद एयरटेल, आइडिया, बीएसएनएल का नंबर आता है। लोगों ने यह सोचकर जिओ सिम लिया था कि कंपनी बड़ी है, नेटवर्क बेहतर होगा, नेट फास्ट चलेगा। लेकिन पाली में जिओ का नेटवर्क उक्त सोच पर पानी फेर रहा है। ऐसे में पहले पसंद, अब नेटवर्क परेशानी में उपभोक्ता जिओ सिम छोड़ने की सोच रहे हैं। जिओ के बदहाल सेवा को लेकर उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन पेमेंट फेल हो जा रहे हैं, वीडियो कॉल में आवाज कट रही है, नेट 2जी की स्पीड से चल रहा है और कॉल भी 10 में से 4 बार ड्रॉप हो रहा। यही वजह है कि अब लोगों का रुझान जिओ सिम से कम होने लगा है और लोग पोर्ट कराकर दूसरी कंपनी में जाने की सोच रहे हैं। सबसे बड़ी विडंबना ये है कि समस्या पाली ब्लॉक में ही बनी हुई है। जहां बैंक, सरकारी दफ्तर, स्कूल- कालेज और व्यापार सब मोबाइल नेट पर निर्भर हैं और यदि ब्लॉक मुख्यालय में जिओ का यह हाल है तो इसके ग्रामीण और दूर- दराज क्षेत्रों में क्या हाल होगा? जिओ को लेकर पाली ब्लॉक के अलावा कोरबा जिले के अन्य ब्लॉकों में इसकी सेवा बेहतर बताई जा रही है। आखिर पाली ब्लॉक में ही जिओ का नेटवर्क क्यों फेल है? लोगों को आशंका है कि पाली में टावर कम है, मेंटनेंस नही हो रही, या लोड ज्यादा है। लेकिन कंपनी की तरफ से कोई ठोस जवाब नही मिल पा रहा, जबकि पाली ब्लॉक में अन्य कंपनियों से जिओ को बेहतर माना जा रहा हैं। ऐसे में क्या कंपनी के लिए उपभोक्ता महत्त्वपूर्ण नही हैं? अथवा जब तक लोग सिम तोड़कर नही फेकेंगे तब तक सुधार नही होगा? जिओ उपभोक्ताओं की मांग है कि पाली ब्लॉक में नए टावर लगाए जाएं और मौजूदा टावरों की क्षमता बढ़ाई जाए, जिओ के जिला अधिकारी आकर समस्या का कारण बताएं और समाधान की समयसीमा दें, जब सेवा ढंग से नही दे पा रहें तो रिचार्ज पर छूट या अतिरिक्त डेटा उपलब्ध कराएं। जिओ उपभोक्ताओं का कथन कि यदि यही हाल रहा तो वे जल्द ही सिम बदल देंगे।



