जिले के ग्राम पंचायत कुरूडीह में बने सार्वजनिक शौचालय की दशा आज यह है कि ना तो उसमें पानी की सुविधा है और ना ही बेहतर दरवाजे जहां केवल योजनाओं को कमीशन के लिए लाया जाता है जिसका आज कोई उपयोग नहीं हो रहा है जिसकी लागत राशि 350000 रुपए में तैयार किया गया यह शौचालय आज सफेद हाथी साबित हो रहा है जिसमें केवल कमीशन का खेल चला है
ऐसा इसलिए कहा जा सकता है कि जहां इसकी आवश्यकता नहीं होती उस जगह पर भी इसे बना दिया जाता है जो केवल अपनी कमीशन के लिए बनाया जाता है
और देखने वाली बात यह भी है कि
जहां महिला आरक्षित सीट करके महिलाओं को सरपंच बनाए जाते हैं लेकिन महिलाएं सरपंच तो बन जाती है पर उनकी पूरी जिम्मेदारी सरपंच पति निभाते हैं जो आज अपने आप को एस पी कहते हैं और मजे की बात तो यह है कि कुरूडीह पंचायत भवन में जो मोबाइल नंबर दर्ज किया गया है वह सरपंच पति का मोबाइल नंबर है जहां फोन लगाने पर सरपंच पति फोन रिसीव करते हैं जब हमने सरपंच महोदया से बात करनी चाहिए तो सरपंच महोदया यह कहने लगी की सचिव जानेंगे और मेरे पति जानेंगे कहकर अपना पल्ला झाड़ ली
तो यह जांच का विषय तब बन जाता है जब शासन से महिला आरक्षित सीट अनिवार्य कर दिया जाता है लेकिन वह उस पद की जिम्मेदारी अपने पति या किसी बुद्धिजीवी के ऊपर निर्भर हो जाती हैं और बस यूं ही जब ठप्पा लगवाना होता है तब वह अपनी जिम्मेदारी निभाती है ठप्पा लगाकर
तो इस पर शासन को चाहिए कि ऐसे महिला आरक्षित पंचायत को संज्ञान में लेकर उसे पंचायत में जांच करें और जहां महिला सरपंच का दायित्व सरपंच पति निभा रहे हो उन पर कार्रवाई करें जो शासन के नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं जहां कहीं भी महिलाओं को पंच सरपंच जनपद सदस्य चुने जाते हैं लेकिन उनके पति ही पंच सरपंच जनपद सदस्य का दायित्व निभाते हैं शासन ऐसे पंचायत पर विशेष ध्यान दें जहां महिला आरक्षित कर दिए जाते हैं
और वही कुरूडीह पंचायत में बने स्वच्छ भारत मिशन के तहत सार्वजनिक शौचालय पर भी जांच करें जिसमें किसी प्रकार की सुविधा नहीं है लागत राशि लिख दी गई है 350000 रुपए
वही ग्राम वासियों से बातचीत करने पर पता चला कि यह शौचालय बना है लेकिन कभी किसी ने इसका उपयोग नहीं किया है और न जरूरत थी
शासन ऐसी योजनाओं को स्थान और जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराये जिसका सदुपयोग हो सके






