गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले के वन क्षेत्रों में बेशकीमती सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाने के दावों के बीच पीपरखूंटी बीट से एक बार फिर चिंताजनक मामला सामने आया है। बीट क्षेत्र में करीब 21 नग सागौन के पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल में लगातार पेड़ों की कटाई की घटनाएं सामने आ रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग की निगरानी व्यवस्था पर प्रभावी सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, मामले की शिकायत वन विभाग तक पहुंचने के बाद विभागीय अमला मौके पर पहुंचा और वहां पड़ी कटी हुई लकड़ियों को उठाकर ले गया। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ काटे जाने तक वन विभाग की नियमित गश्त और निगरानी व्यवस्था कहां थी?
शिकायत के बाद सक्रिय हुआ विभाग, लेकिन उठ रहे कई सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की नियमित निगरानी और गश्त प्रभावी तरीके से नहीं होने के कारण अवैध कटाई करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि यदि वन क्षेत्र में लगातार निगरानी होती, तो एक साथ इतनी संख्या में सागौन के पेड़ों की कटाई संभव नहीं होती।
वहीं, कुछ ग्रामीणों ने लकड़ी माफियाओं और जिम्मेदार कर्मचारियों के बीच कथित मिलीभगत के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग उठ रही है।
बेशकीमती सागौन पर लगातार संकट
सागौन की लकड़ी अपनी गुणवत्ता और बाजार मूल्य के कारण लंबे समय से अवैध कटाई करने वालों के निशाने पर रहती है। पीपरखूंटी बीट में सामने आया यह मामला वन सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल कटाई के बाद लकड़ी जब्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि पेड़ किसने काटे, लकड़ी कहां ले जाई जानी थी और इतने बड़े पैमाने पर कटाई विभाग की नजर से कैसे बची।
ग्रामीणों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मौके की जांच, काटे गए पेड़ों की संख्या और प्रजाति का सत्यापन, जिम्मेदारों की पहचान तथा अवैध कटाई में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पीपरखूंटी बीट में 21 सागौन के पेड़ों की कटाई आखिर किसकी लापरवाही से हुई और क्या इस मामले में केवल कटी लकड़ियां उठाकर कार्रवाई पूरी मान ली जाएगी, या फिर अवैध कटाई के पीछे सक्रिय लोगों तक पहुंचकर सख्त कार्रवाई भी की जाएगी?





















