कोरबा। कोरबा जिले सहित पूरे बिलासपुर रेंज में कबाड़ कारोबार को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। चोरी के माल की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी अंकुश लगाने और कबाड़ कारोबार को व्यवस्थित करने की मांग उठाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं पत्रकार उदय चौधरी ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि कबाड़ कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों की जांच कर लाइसेंस, पंजीयन और खरीदी-बिक्री के रिकॉर्ड की व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू कराया जाए।
मांग में कहा गया है कि कबाड़ कारोबार बंद करना समाधान नहीं है, बल्कि इसे कानूनी और पारदर्शी तरीके से व्यवस्थित करना जरूरी है। वैध कबाड़ी व्यवसायी यदि नियमानुसार कारोबार करें, खरीदे गए प्रत्येक सामान का रिकॉर्ड रखें और चोरी के संदिग्ध माल की खरीद से बचें, तो चोरी के माल को बाजार मिलने की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है।
चोरी के माल की खरीद पर निगरानी जरूरी
कबाड़ दुकानों और गोदामों में अक्सर लोहे, एल्युमिनियम, तांबा, केबल, मोटर-पार्ट्स सहित विभिन्न प्रकार की धातु और अन्य सामग्री खरीदी-बेची जाती है। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाना जरूरी है कि कबाड़ी द्वारा खरीदा गया सामान कहां से आया और उसे बेचने वाला व्यक्ति कौन है। प्रत्येक खरीद का रजिस्टर या डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए, ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस जांच के दौरान सामान के स्रोत का पता लगाया जा सके।
विशेष रूप से सरकारी संस्थानों, स्कूल-कॉलेजों, निर्माण स्थलों, बिजली व्यवस्था और सार्वजनिक संपत्तियों से चोरी होने वाले सामान की कबाड़ बाजार में बिक्री को लेकर निगरानी बढ़ाने की जरूरत बताई गई है।
संदिग्ध कबाड़ दुकानों की हो विशेष जांच
मांग में संदिग्ध कबाड़ दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों की विशेष जांच किए जाने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी दुकान पर चोरी का सामान पहुंचता है तो संबंधित कबाड़ी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। रात के समय होने वाली लोडिंग-अनलोडिंग और वाहनों के माध्यम से कबाड़ के परिवहन पर भी निगरानी बढ़ाने की जरूरत है।
लाइसेंस और रिकॉर्ड व्यवस्था हो अनिवार्य
कबाड़ कारोबार के लिए लाइसेंस/पंजीयन की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने, हर खरीद का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और संदिग्ध सामान मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इससे वैध कारोबार करने वाले कबाड़ी और चोरी के माल का कारोबार करने वालों के बीच अंतर स्पष्ट हो सकेगा।
साथ ही मांग की गई है कि चोरी के मामलों और कबाड़ बाजार के रिकॉर्ड का आपस में मिलान किया जाए। यदि किसी इलाके में लगातार किसी विशेष प्रकार की धातु या उपकरण चोरी हो रहे हैं, तो उसी अवधि में कबाड़ दुकानों में पहुंचने वाले सामान की भी जांच की जाए।
अपराधियों को संरक्षण देने वालों पर भी हो कार्रवाई
मांग में यह भी जोर दिया गया है कि केवल चोरी करने वाले आरोपियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। यदि कोई व्यक्ति चोरी का माल खरीदता है, उसे खपाने में मदद करता है या अपराधियों को संरक्षण देता है, तो उसकी भूमिका की भी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। शिकायतकर्ताओं की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
सवाल यह है कि कबाड़ कारोबार को लेकर नियम और निगरानी व्यवस्था होने के बावजूद यदि चोरी का माल बाजार तक पहुंचता है, तो उसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी? जरूरत इस बात की है कि पुलिस और संबंधित विभाग मिलकर कबाड़ दुकानों की नियमित जांच करें, रिकॉर्ड व्यवस्था को मजबूत बनाएं और चोरी के माल की खरीद-फरोख्त की पूरी कड़ी पर कार्रवाई करें। इससे एक ओर जहां वैध कबाड़ कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, वहीं चोरी और अवैध कबाड़ कारोबार पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।






















