कोरबा। बालको वन क्षेत्र के चुईया नाला में कथित अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर खनिज विभाग की कार्रवाई अब खुद सवालों के घेरे में दिखाई दे रही है। स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों और चर्चाओं में वेदप्रकाश साहू निवासी बेला कछार, पूर्व सरपंच शिवराज राठिया और वर्तमान सरपंच पूजा राठिया के नाम कथित रेत गतिविधियों से जोड़े जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना बाकी है।
मामला उस समय और चर्चा में आया, जब विश्वकर्मा पूजा से पहले एक स्थानीय चालक अपने ट्रैक्टर के इंजन की सफाई कर रहा था। स्थानीय लोगों का दावा है कि मौके पर पहुंची खनिज विभाग की टीम ने ट्रैक्टर के इंजन को जब्त कर बालको थाने में खड़ा कराया, जबकि मौके पर न रेत थी, न ट्रॉली और न ही रेत परिवहन होता पाया गया, ऐसा स्थानीय लोगों का कहना है।
इंजन पर कार्रवाई, लेकिन रेत लदा टिप्पर कहां गया?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान मौके पर रेत से लदा एक टिप्पर भी मौजूद था। आरोप है कि कार्रवाई की जद में आने से पहले उक्त वाहन वहां से निकल गया।
यदि यह दावा सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है—रेत लदे वाहन की जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? वहीं जिस चालक के पास कथित तौर पर रेत ही नहीं थी, उसके इंजन को जब्त करने की कार्रवाई क्यों की गई?
इन सवालों का जवाब अब खनिज विभाग से मांगा जा रहा है।
वेदप्रकाश की टीपर, में रेत लेकिन रॉयल्टी किसी और की?
मामले में एक और महत्वपूर्ण बिंदु सामने आने की बात कही जा रही है, जिसकी दस्तावेजों के आधार पर जांच जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वेदप्रकाश साहू से जुड़ी बताई जा रही टीपर पकड़े जाने के बावजूद उसकी रॉयल्टी कथित तौर पर सन्नी सिंह के नाम की दिखाई गई। वहीं यदि चुईया नाला क्षेत्र में रेत का भंडारण वेदप्रकाश साहू से संबंधित बताया जा रहा है, तो फिर सवाल उठता है कि उस भंडारण की रॉयल्टी कहां है और किसके नाम पर जारी हुई?
क्या रेत का वास्तविक स्रोत और रॉयल्टी रिकॉर्ड एक-दूसरे से मेल खाते हैं?
क्या वाहन, भंडारण और रॉयल्टी के दस्तावेजों में कोई अंतर है?
यदि रिकॉर्ड में अंतर पाया जाता है तो यह पूरे मामले की जांच का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।
आखिर रेत किसके भंडारण से निकली, किसके नाम की रॉयल्टी दिखाई गई और वास्तविक कारोबार किसके नियंत्रण में था?
कार्रवाई से पहले सूचना पहुंचने का आरोप—कौन है ‘सूचना देने वाला’?
चुईया नाला मामले में सबसे गंभीर सवाल कथित सूचना लीक को लेकर उठ रहा है।
स्थानीय सूत्रों का आरोप है कि खनिज विभाग की टीम के कार्रवाई के लिए निकलने से पहले ही कथित रेत कारोबारियों को इसकी भनक लग जाती है। इसके बाद वाहन और मशीनें मौके से हट जाने की चर्चा है।
अब सवाल सीधा है—
अगर कार्रवाई की खबर टीम के पहुंचने से पहले ही बाहर निकल रही है, तो सूचना आखिर पहुंचा कौन रहा है?
क्या विभागीय तंत्र से जुड़ा कोई व्यक्ति कार्रवाई की जानकारी बाहर पहुंचा रहा है?
या फिर कार्रवाई से पहले ही किसी अन्य माध्यम से सूचना कारोबारियों तक पहुंच रही है?
इन सवालों की निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति सामने ला सकती है।
‘साहब’ तक पहुंचने से पहले ही खबर बाहर?
स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कार्रवाई के लिए सरकारी अमला निकलता है और मौके तक पहुंचने से पहले ही कथित कारोबारियों को इसकी जानकारी हो जाती है।
यदि ऐसा हो रहा है तो यह सिर्फ अवैध रेत कारोबार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कार्रवाई की गोपनीयता और विभागीय सूचना तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करेगा।
हालांकि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा सूचना लीक करने का आरोप अभी प्रमाणित नहीं हुआ है। इसलिए इस पूरे आरोप की पुष्टि के लिए विभागीय रिकॉर्ड, कार्रवाई की टाइमलाइन और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच आवश्यक है।
किसका संरक्षण? सवाल जनता के बीच, जवाब जांच से सामने आए
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि यदि चुईया नाला में लंबे समय से रेत का कारोबार होने के आरोप हैं, तो आखिर इसे संचालित करने वालों को किसका संरक्षण या समर्थन प्राप्त है?
कौन सपोर्ट कर रहा है?
किसके इशारे पर गतिविधियां चल रही हैं?
किसे कार्रवाई की पहले जानकारी मिल रही है?
और कार्रवाई के बाद भी कथित नेटवर्क तक जांच क्यों नहीं पहुंच रही?
इन सवालों के जवाब केवल चर्चा से नहीं, बल्कि दस्तावेजी जांच और जिम्मेदारी तय होने से सामने आने चाहिए।
प्रशासन से 8 सीधे सवाल
1. चुईया नाला में रेत उत्खनन और भंडारण की वैध अनुमति किसके नाम पर है?
2. कथित रेत लदे टिप्पर की मौके पर जांच और कार्रवाई हुई या नहीं?
3. बिना रेत और ट्रॉली के इंजन जब्त करने का कानूनी आधार क्या था?
4. यदि पकड़ी गई टीपर वेदप्रकाश साहू से संबंधित बताई जा रही है, तो उसकी रॉयल्टी सन्नी सिंह के नाम पर क्यों दिखाई गई?
5. यदि भंडारण वेदप्रकाश साहू का बताया जा रहा है, तो उस भंडारण की रॉयल्टी किसके नाम पर है?
6. वाहन, रॉयल्टी, भंडारण और रेत के वास्तविक स्रोत का आपस में मिलान कराया गया है या नहीं?
7. कार्रवाई से पहले सूचना लीक होने के आरोपों की विभागीय जांच होगी या नहीं?
8. चुईया नाला की पूरी रेत गतिविधि और कथित नेटवर्क की स्वतंत्र जांच कर जिम्मेदारी तय की जाएगी या नहीं?
सिर्फ इंजन नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच जरूरी
चुईया नाला का मामला अब सिर्फ एक ट्रैक्टर के इंजन की जब्ती तक सीमित नहीं रह गया है। यदि अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के आरोप सही पाए जाते हैं तो कार्रवाई केवल चालक या छोटे वाहन तक सीमित रहने के बजाय रेत के स्रोत, भंडारण, रॉयल्टी, वाहन मालिक, परिवहन श्रृंखला और कथित नेटवर्क तक पहुंचनी चाहिए।
और यदि सूचना लीक होने, रॉयल्टी में अंतर या रेत के भंडारण से जुड़े आरोप गलत हैं, तो प्रशासन के लिए रिकॉर्ड सामने रखकर स्थिति स्पष्ट करने का यह उचित अवसर है।
रेत का खेल आखिर किसके इशारे पर चल रहा है?
वास्तविक रेत मालिक कौन है?
रॉयल्टी किसकी और माल किसका?
कार्रवाई से पहले खबर किसे मिलती है?
और अगर विभागीय सूचना बाहर जाने की बात सही है, तो जिम्मेदार कौन है?
इन सवालों के जवाब अब चुईया नाला के साथ-साथ जिला प्रशासन और खनिज विभाग से भी मांगे जा रहे हैं।
SN इंडिया न्यूज की अगली नजर—चुईया नाला से जुड़े रॉयल्टी रिकॉर्ड, भंडारण दस्तावेज, वाहन रिकॉर्ड और कथित सूचना लीक से जुड़े उपलब्ध साक्ष्यों पर।


