कोरबा ब्रेकिंग न्यूज़ (छत्तीसगढ़)। जिले के चूइया क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और भंडारण पर नकेल कसने के बजाए खनिज विभाग के अधिकारियों द्वारा संदिग्ध भूमिका निभाने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि खनिज विभाग की टीम ने अवैध रूप से डंप की गई रेत को जब्त करने या नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाए उसमें मिट्टी मिलाकर उसे बर्बाद कर दिया, जिससे शासन को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा है।
प्राप्त जानकारी और वायरल ऑडियो-वीडियो साक्ष्यों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई खनिज विभाग के अधिकारी मदन साहू (तीन स्टार) की मौजूदगी और उनके निर्देशों पर अंजाम दी गई। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित पक्षों का कहना है कि मौके पर 200 से 300 ट्रैक्टर रेत का विशाल स्टॉक जमा था, जिस पर कानूनी जब्ती बनाने के बजाए अधिकारियों ने जेसीबी और मशीनों से मिट्टी भरवा दी।
मुख्य बिंदु और सवाल:
* किसके दबाव में हुई यह ‘मिट्टी-मिलाओ’ कार्रवाई? अवैध रेत को जब्त कर उसकी नीलामी से सरकार को लाखों रुपये का राजस्व मिल सकता था। लेकिन कार्रवाई के नाम पर रेत में मिट्टी मिलाकर राजस्व को सीधा चूना लगाया गया। सवाल उठता है कि मदन साहू शिव कुमार संजीव लहरे धर्मेंद्र गुप्ता अजय राठौड़ और उनकी टीम ने किसके आदेश पर यह कदम उठाया?
* नामजद माफियाओं को बचाने की साजिश?
स्थानीय लोगों (भीम व अन्य) के अनुसार, चूइया क्षेत्र में डंप की गई यह रेत सरपंच, उपसरपंच (इरफान), करम सिंह, और महापावर से जुड़े लोगों की बताई जा रही है। इसके बावजूद मुख्य आरोपियों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
* रेत माफिया को सीधा संरक्षण:
कार्रवाई के नाम पर लीपापोती करने और रेत में मिट्टी मिलाने के इस तरीके से खनिज विभाग की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या यह माफियाओं को बचाने और साक्ष्य मिटाने का प्रयास था?
* अधिकारियों की चुप्पी पर उठते सवाल:
दिन-दोपहर गाड़ियों में पहुंचे अधिकारियों ने करीब शाम तक रुककर इस खेल को अंजाम दिया।
शासन और उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर मदन साहू सहित पूरी जांच टीम की भूमिका की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। अवैध रेत पर पर्दा डालने वाले ऐसे अधिकारियों और रेत माफिया के गठजोड़ पर कड़ी कार्रवाई की दरकार है।
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