SN इंडिया न्यूज | कोरबा
कोरबा। अमरैयापारा के वार्ड क्रमांक 14 में एक परिवार के मकान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रशासन की चौखट तक पहुंच गया है। मामला केवल निर्माण या मकान से जुड़ा नहीं, बल्कि परिवार की सुरक्षा, लंबे समय से निवास और कथित धमकियों के आरोपों तक पहुंच गया है। मामले को लेकर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा की ओर से प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।

आवेदन में बताया गया है कि अमरैयापारा क्षेत्र में सिख समाज के कई परिवार दशकों से निवासरत हैं और सामाजिक सौहार्द में अपनी भूमिका निभाते रहे हैं। इसी क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 14, मकान नंबर 974 निवासी मोहान सिंह के परिवार के बारे में दावा किया गया है कि वह करीब 40 वर्षों से उसी स्थान पर रह रहा है।
बताया गया कि तेज बारिश के कारण पुराने मकान को नुकसान पहुंचने के बाद उसी स्थान पर मरम्मत और पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। इस संबंध में नगर निगम में आवेदन दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
‘बाहरी’ बताने को लेकर उठे सवाल
भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के जिलाध्यक्ष उत्तम सिंह रंधावा ने कलेक्टर को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा राजनीतिक उद्देश्य से मोहान सिंह को ‘बाहरी’ बताकर उनके मकान को अवैध बताया जा रहा है और दबाव बनाया जा रहा है।
मोर्चे का कहना है कि शहर में पुराने मकानों और अतिक्रमण से जुड़े अनेक मामले मौजूद हैं, ऐसे में किसी एक परिवार को लेकर विवाद खड़ा किए जाने की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
धमकी के आरोप से मामला गंभीर
गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के आवेदन में मकान विवाद को लेकर कथित तौर पर धमकी दिए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। आवेदन के मुताबिक पुलिस चौकी मानिकपुर और थाना कोतवाली में पूर्व में सूचना अथवा लिखित शिकायत दिए जाने का उल्लेख है।
गुरुद्वारा प्रबंधन ने प्रभावित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और धमकी के आरोपों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
तीन विभागों की संयुक्त जांच की मांग
मामले में भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा ने तहसीलदार, जोन कमिश्नर और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (T&CP) के अधिकारियों की संयुक्त टीम बनाकर स्थल निरीक्षण कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि आखिर 40 वर्षों से निवासरत बताए जा रहे परिवार के मकान को लेकर उठे विवाद की वास्तविकता क्या है? क्या निर्माण नियमों के अनुरूप है, क्या जमीन और मकान से जुड़े दस्तावेज सही हैं और धमकी के लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है—इन सभी सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल दोनों पक्षों की शिकायतें प्रशासन के सामने हैं और निगाहें अब निष्पक्ष जांच एवं आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।


