कोरबा। शहर के सुभाष चौक से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस विभाग की वर्दी और अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में पदस्थ एक आरक्षक के शराब के नशे में कथित तौर पर गाली-गलौच और हंगामा करने का मामला सामने आया है। घटनाक्रम से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि सुभाष चौक क्षेत्र में आरक्षक की कथित हरकतों को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने विरोध किया। इसके बाद मौके पर पुलिस की मौजूदगी में संबंधित आरक्षक को मेडिकल जांच के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। लेकिन आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी विवाद और कथित हुज्जतबाजी का सिलसिला पूरी तरह नहीं थमा।
मामले में सामने आई जानकारी के अनुसार जांच के दौरान आरक्षक की पहचान पवन कुमार जाट, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के आरक्षक के रूप में बताई जा रही है। वहीं, ब्रेथ टेस्ट में 281 की रीडिंग आने की बात कही जा रही है। हालांकि इस रीडिंग की आधिकारिक रिपोर्ट और पूरे घटनाक्रम की पुष्टि संबंधित विभागीय दस्तावेजों/अधिकारियों से होना बाकी है।
वीडियो वायरल, मौके पर पुलिस और बजरंग दल के कार्यकर्ता
घटना से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की बात सामने आ रही है। वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ बजरंग दल के कार्यकर्ता भी मौके पर नजर आने की जानकारी है। वीडियो सामने आने के बाद लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि जिस वर्दी से आम नागरिकों से कानून और अनुशासन का पालन कराने की उम्मीद की जाती है, उसी वर्दी से जुड़े किसी कर्मचारी पर सार्वजनिक स्थान पर इस तरह के व्यवहार के आरोप लगना बेहद गंभीर विषय है।
सवाल सिर्फ एक आरक्षक का नहीं, वर्दी की साख का भी
यह मामला अब केवल कथित शराबखोरी या सार्वजनिक स्थान पर हंगामे तक सीमित नहीं रह गया है। सबसे बड़ा सवाल पुलिस विभाग के अनुशासन और वर्दी की गरिमा को लेकर उठ रहा है।
आम नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह सार्वजनिक स्थान पर कानून-व्यवस्था और मर्यादा बनाए रखे। ऐसे में यदि पुलिस बल का कोई कर्मचारी ही नशे की हालत में सार्वजनिक जगह पर कथित रूप से गाली-गलौच या विवाद करता पाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से यह सवाल उठता है कि आम लोगों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले विभाग के भीतर अनुशासन की निगरानी कौन करेगा?
वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, बल्कि कानून और व्यवस्था की पहचान है। पुलिसकर्मी का आचरण सीधे पूरे विभाग की छवि से जुड़ता है। यही वजह है कि इस तरह की किसी भी घटना में निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने आना जरूरी है।
“जब प्रशासन का सिपाही ही… तो आम जनता पर क्या असर?”
घटना के बाद लोगों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि अगर कानून व्यवस्था संभालने वाले विभाग का कोई कर्मचारी ही सार्वजनिक जगह पर नियमों के उल्लंघन के आरोपों में घिरता है, तो इसका आम जनता पर क्या संदेश जाएगा?
लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, वायरल वीडियो की सत्यता की जांच की जाए, ब्रेथ टेस्ट की आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड के अनुसार स्पष्ट की जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।
फिलहाल मामले में सामने आई जानकारी, वायरल वीडियो और ब्रेथ टेस्ट से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। SN इंडिया न्यूज इस मामले में संबंधित विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा।


