पैकेट पर ‘Best Before 3 Months’ तो लिखा, लेकिन पैकिंग की तारीख और Batch No. कहां है? ग्राहक आखिर कैसे जाने कि नमकीन कब बनी?
कोरबा। SN इंडिया न्यूज।
कोरबा में खाद्य पदार्थों की पैकिंग और गुणवत्ता को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दुकानों में बिक रहे पैकेज्ड नमकीन की लेबलिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए ‘सदाबहार’ नमकीन के पैकेट पर निर्माता का पता जालाराम मिक्सचर, गांधी चौक, कोरबा दर्ज है, लेकिन पैकेट की तस्वीर में “Packed on” के सामने तारीख और “Batch No.” के सामने कोई स्पष्ट विवरण नजर नहीं आ रहा है।
मामला इसलिए भी गंभीर सवाल खड़े करता है क्योंकि इसी पैकेट पर बड़े अक्षरों में लिखा है—“BEST BEFORE 3 MONTHS FROM MFG.” यानी निर्माण के तीन महीने तक उत्पाद को बेहतर माना गया है। लेकिन जब निर्माण या पैकिंग की वास्तविक तारीख ही स्पष्ट नहीं होगी, तो आम उपभोक्ता आखिर यह कैसे तय करेगा कि उसके हाथ में आया पैकेट ताजा है या उसकी निर्धारित अवधि पूरी होने के करीब?
‘तीन महीने तक बेहतर’… लेकिन तीन महीने की गिनती शुरू कब से?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है।
पैकेट पर “Best Before 3 Months from Mfg.” का उल्लेख है, लेकिन तस्वीर में मैन्युफैक्चरिंग/पैकिंग डेट का स्पष्ट अंकन दिखाई नहीं देता। ऐसे में ग्राहक के सामने सीधा सवाल खड़ा होता है—इस पैकेट की तीन महीने की अवधि किस तारीख से शुरू मानी जाए?
अगर किसी ग्राहक ने आज यह पैकेट खरीदा, तो उसके लिए यह जानना जरूरी है कि नमकीन कब तैयार हुई थी और कब तक इसका सेवन किया जाना उचित है।
FSSAI के उपलब्ध नियमों के अनुसार पैकेज्ड खाद्य पदार्थों के लेबल पर बैच/कोड/लॉट पहचान तथा date marking जैसी जानकारी का प्रावधान है।
Batch No. भी खाली, तो उत्पाद की ट्रेसिंग कैसे होगी?
पैकेट पर “Batch No.” के सामने भी तस्वीर में कोई स्पष्ट नंबर दिखाई नहीं देता। यही बिंदु खाद्य सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हो जाता है।
बैच नंबर केवल एक औपचारिकता नहीं है। यह किसी उत्पाद के निर्माण बैच की पहचान और जरूरत पड़ने पर उसकी ट्रेसिंग में मदद करता है। यदि किसी खास बैच को लेकर शिकायत सामने आए या किसी उत्पाद की गुणवत्ता की जांच करनी पड़े, तो बैच की पहचान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि अगर पैकेट पर बैच नंबर ही दर्ज नहीं है, तो किसी विशेष उत्पादन बैच की पहचान कैसे होगी?
MRP ₹5, निर्माता का पता मौजूद, लेकिन तारीख का कॉलम खाली!
पैकेट पर ₹5/- MRP, उत्पाद का नाम, सामग्री और निर्माता का पता जैसी जानकारियां दिखाई दे रही हैं। पैकेट पर FSSAI का चिन्ह भी नजर आ रहा है। लेकिन इसके साथ ही “Packed on” और “Batch No.” वाले हिस्से का खाली दिखाई देना उपभोक्ता के लिए पारदर्शिता का सवाल पैदा करता है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल तस्वीर देखकर यह अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि संबंधित निर्माता ने नियमों का उल्लंघन किया है। संभव है कि किसी दूसरे हिस्से पर जानकारी अंकित हो, प्रिंटिंग में वह दिखाई नहीं दे रही हो या पैकेट की दूसरी खेप में विवरण मौजूद हो। इसलिए वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा पैकेट की जांच से ही हो सकती है।
खाद्य विभाग से जांच की मांग
मामले में अब सवाल यह है कि क्या खाद्य सुरक्षा विभाग इस पैकेट का सैंपल लेकर उसकी वास्तविक निर्माण तिथि, बैच विवरण, लाइसेंस संबंधी जानकारी और लेबलिंग की जांच करेगा?
साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि बाजार में इसी उत्पाद के अन्य पैकेटों पर “Packed on” और “Batch No.” की जानकारी नियमित रूप से अंकित की जा रही है या नहीं।
क्योंकि मामला सिर्फ एक पांच रुपये के नमकीन पैकेट का नहीं है। मामला उपभोक्ता को यह जानने के अधिकार का है कि वह जो खाद्य पदार्थ खरीद रहा है, वह कब तैयार हुआ, किस बैच का है और उसकी निर्धारित अवधि क्या है।
अब निगाह खाद्य सुरक्षा विभाग पर
कोरबा में पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की बिक्री के बीच यह पैकेट सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि जांच में लेबलिंग संबंधी कमी पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
SN इंडिया न्यूज का सवाल सीधा है—
> जब पैकेट पर लिखा है “Best Before 3 Months from Mfg.”, तो उपभोक्ता को यह पता चलेगा कैसे कि यह मिक्सचर बना कब था?
Batch No. के बिना इस पैकेट की पहचान कैसे होगी?
क्या खाद्य सुरक्षा विभाग इस पैकेट की जांच कर उपभोक्ताओं की शंका दूर करेगा?
अब देखना होगा कि गांधी चौक स्थित निर्माता और संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग इस पैकेट की लेबलिंग को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं।
नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध पैकेट की तस्वीर में दिखाई दे रही जानकारी और लागू खाद्य-लेबलिंग प्रावधानों के आधार पर सवाल उठाती है। अंतिम वैधानिक निष्कर्ष संबंधित विभाग की जांच के बाद ही माना जाना चाहिए।




