बिलासपुर/रतनपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कानून की रक्षा करने वाले ही जब कानून तोड़ने लगें तो यह समाज और विभाग दोनों के लिए शर्मनाक स्थिति है। ताजा मामला बिलासपुर जिले के रतनपुर थाने का है, जहां दो पुलिस आरक्षकों पर शराब की तस्करी का आरोप सिद्ध हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रतनपुर थाना में पदस्थ आरक्षक संजय खांडे और सुदर्शन मरकाम ने हाल ही में कुआंजती गांव में एक कोचिया से 50 लीटर महुआ शराब जब्त की थी। मगर शराब को जब्त कर कार्रवाई करने के बजाय दोनों आरक्षक उसे अपने पास रखकर पोड़ी गांव में बेचने की फिराक में थे।
👉 ग्रामीणों ने घेरा, बने बंधक
ग्रामीणों को जब इस गड़बड़ी की भनक लगी, तो उन्होंने दोनों आरक्षकों को घेरकर बंधक बना लिया। ग्रामीणों की भीड़ बढ़ने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस बीच दोनों आरक्षकों ने रतनपुर थाने में फोन कर मदद मांगी। सूचना पर पेट्रोलिंग टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से दोनों आरक्षकों को छुड़ाकर थाने ले आई।
👉 जांच में खुली पोल, तत्काल निलंबन
मामले की जांच में यह स्पष्ट हो गया कि आरक्षकों ने कोचिया को बिना किसी प्रपत्र के छोड़ दिया था और रुपये लेकर 50 लीटर महुआ शराब अपने पास रख ली थी। इसे बेचने की योजना बनाते समय वे ग्रामीणों के हत्थे चढ़ गए। अनुशासनहीनता और संदिग्ध आचरण को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने दोनों आरक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
👉 पुलिस विभाग की किरकिरी
इस घटना ने न केवल पुलिस विभाग की छवि धूमिल की है, बल्कि आम जनता के विश्वास को भी आघात पहुंचाया है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर निगरानी और भी कड़ी होनी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



