कोरबा। प्रदीप राव की रिपोर्ट।
जिले के सतरेंगा क्षेत्र के मारगांव स्थित प्राथमिक शाला की हालत बद से बदतर हो चुकी है। स्कूल के प्रधान पाठक ने बताया कि बीते पांच वर्षों से शाला का शौचालय जर्जर स्थिति में है और पूरी तरह से उपयोग लायक नहीं है। इस संबंध में कई बार संकुल प्रभारी एवं शिक्षा विभाग को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
प्रधान पाठक ने बताया कि वर्ष 2005 में इस शाला भवन का निर्माण कराया गया था, लेकिन आज भवन की हालत इतनी खराब है कि कई जगहों पर सरिया बाहर निकल चुके हैं। सवाल उठता है कि क्या सरकारी भवनों की आयु महज 15 से 20 वर्ष ही होती है? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बनाए भवन और पुल-पुलिया आज भी मजबूती से खड़े हैं, लेकिन आजादी के बाद बने भवनों की गुणवत्ता इतनी कमजोर क्यों हो गई कि दो दशक भी नहीं बीतते और वे जर्जर होने लगते हैं।
ग्राम पंचायत ने भी इस विद्यालय में सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन कई बार दिया, लेकिन अब तक यह आश्वासन केवल कागजों तक ही सीमित है। इस स्थिति से शिक्षा व्यवस्था की पोल खुल रही है और ग्रामीण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।



