कोरबा :- कोरबा की शाम आज कुछ खास रही। आसमान में हल्की ठंडक लेकिन हवा में प्रेम की गर्माहट घुली हुई। हर छत, हर बालकनी में एक ही इंतज़ार उस चांद का जो सिर्फ आसमान में नहीं बल्कि हजारों दिलों में भी चमकने वाला है।
सुबह से उपवास रखी महिलाएँ घर के आँगन में दीप जलाकर पूजा की तैयारी में जुटी रही। सास बहू को सोलह श्रृंगार सिखा रही है तो छोटी बच्ची अपनी माँ की तरह छलनी थामने की ज़िद कर रही है।
यह दृश्य सिर्फ एक पर्व का नहीं बल्कि उस संस्कार का है जो कोरबा के हर परिवार में रिश्तों की डोर को और मज़बूत करता है।
थाली में दीपक, छलनी में चांद और सामने खड़ा जीवन साथी वह पल किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं होता।
पति मुस्कुराते हुए पत्नी की ओर जल बढ़ाता है, और उसकी आँखों में कृतज्ञता और प्रेम की चमक साफ झलकती है। वह समझता है कि यह व्रत सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि उसके जीवन की सबसे खूबसूरत दुआ है जो उसकी पत्नी ने चुपचाप पूरे दिन निभाई है।
कोरबा के हर मोहल्ले में आज एक जैसा माहौल है कहीं गीत गूंज रहे हैं, कहीं आरती की थाली सज रही है, और कहीं परिवार एक साथ बैठकर इस पर्व का आनंद ले रहा है। यह वही क्षण है जब रिश्तों की गहराई, प्रेम की मिठास और परिवार की एकता एक साथ झिलमिलाने लगती है।
करवा चौथ के चांद ने कोरबा की रात को और भी रूमानी बना दिया। यह सिर्फ चांद नहीं विश्वास, समर्पण और सच्चे प्यार का प्रतीक है।
हर पत्नी की दुआ और हर पति की मुस्कान इस चांद की रौशनी में मिलकर एक ही बात कहती है
“साथ हो तो हर दिन करवाचौथ जैसा है।”
कोरबा वासियों को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं,
यह चांद आपके रिश्तों में सदा प्रेम, अपनापन और उजाला भरता रहे।






















