कोरबा/पाली:- सुरक्षा बल और पुलिसिया सांठगांठ से बुड़बुड़ खदान के भीतर से कोयला चोरी का सिलसिला एक बार पुनः प्रारंभ हो गया है। खदान के आसपास बसे गांव के ग्रामीण मजदूर अब मजदूरी कार्य छोड़ खदान के भीतर से कोयला निकालने में मस्त है और उस कोयले को इकट्ठा कर तस्करों को 200 रुपए बोरी के हिसाब से बेच रहे है। हालांकि अब चोरी और तस्करी का तरीका थोड़ा बदल गया है, अब ट्रकों की जगह पिकअप और ऑटो डग्गा से कोयला निकलता है जो सीमावर्ती बिलासपुर जिले के रतनपुर थानांतर्गत संचालित कोल डिपो में खपता है। सूत्र बताते है कि नानपुलाली, कछारपारा, बुड़बुड़, राहाडीह के ग्रामीण मजदूर वर्ग सांझ ढलते खदान के भीतर जाकर बोरी में कोयला भरते है। जिस एक बोरी कोयले की कीमत खदान में तैनात सुरक्षा कर्मियों को 50 रुपए तय किया गया है। इस प्रकार ग्रामीण आसानी से खदान के भीतर से कोयला निकाल अपने घरों, बाड़ी में इकट्ठा करते है और जिसे तस्करों को 200 के हिसाब से बेच रहे है। तस्कर भी प्रतिदिन अलसुबह 5 से 7 पिकअप कोयला कोल मंडियों में खपा रहे है। इस चोरी और तस्करी के खेल में जहां ग्रामीण प्रतिदिन हजारों कमा रहे है तो तस्करों के भी पौ बारह है। दूसरी ओर दुपहिया वाहन के माध्यम से भी चोरी का कोयला होटलों- ढाबों और ईंट भट्ठों में खपाया जा रहा है। रोजाना दर्जनों दुपहिया वाहन में 3- 4 बोरी कोयला लादकर फर्राटे भरते आसानी से देखा जा सकता है। आरोप है कि इन मामलों में स्थानीय पुलिस की माहवारी बंधी है, जहां दुपहिया वाहन और पिकअप- ऑटो से कोयला खपाने वालो से अलग- अलग राशि तय की गई है। कोयला चोरी के काम मे ज्यादातर किशोर व ग्रामीण युवकों की संलिप्तता से उनका भविष्य चौपट हो रहा है और गांवों का माहौल अशांत होने से बुजुर्ग ग्रामीणों में आक्रोश की भावना है। इससे पुलिस और सुरक्षा अमले की छवि पर भी दाग लग रहा है। इस अवैध कारोबार पर पुलिस प्रशासन द्वारा सख्ती से रोक लगाने की अपेक्षित मांग ग्रामीण कर रहे है, ताकि ग्रामीण किशोर और युवा वर्ग का भविष्य चोरी जैसे कृत्य में संलिप्त होकर अंधकारमय होने से बच जाए
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