कोरबाजिला अस्पताल के 3 साल पहले मेडिकल कॉलेज संबद्ध होने के बाद सुविधाएं व संसाधन बढ़ने से ओपीडी व आईपीडी में इलाज कराने पहुंचने वाले मरीजों की संख्या 2-3 गुनी हो चुकी है। जिससे एक्स-रे व सोनोग्राफी कराने वाले मरीजों की संख्या भी उसी अनुपात में बढ़ी है, लेकिन रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में संसाधन व स्टाफ नहीं बढ़ा। खामियाजा मरीजों को परेशान होकर उठाना पड़ रहा है, क्योंकि रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट में जहां सोनोग्राफी के लिए मरीजों को 20-30 दिन का वेटिंग मिल रहा है तो एक्स-रे कराने के बाद फिल्म नहीं मिल रहा है।
दरअसल एक्स-रे के लिए एक ही डिजिटल मशीन लगा है लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण मशीन समेत उसके पूरक मशीन में भी खराबी आ जा रही है। करीब 3 माह से डिजिटल एक्स-रे मशीन का प्रिंटर खराब होने के कारण मरीजों को फिल्म नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में एक्स-रे कराने के बाद मरीजों को उनके मोबाइल पर ऑनलाइन फिल्म भेजी जा रही है। जिसे देखकर ही डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, कई केस में स्क्रीन से रिपोर्ट देखने पर भ्रम की स्थिति भी निर्मित हो रही है। ऐसे में एक्स-रे फिल्म की आवश्यकता होने पर मरीजों को बाहर निजी सेंटर जाकर फिर से एक्स-रे कराना पड़ रहा है, जिससे मरीजों को आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।
रेडियोलॉजी डिपार्टमेंट के मुताबिक पुलिस से जुड़े मुलाहिजा केस, आईपीडी में भर्ती मरीज समेत गंभीर हालत में पहुंचे मरीजों के केस को इमरजेंसी केस मानकर उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है। जिसके तहत मेनुअल मशीन से एक्स-रे करके मेनुअल तरीके से फिल्म तैयार करके दी जाती है। हालांकि मेनुअल एक्स-रे में ज्यादा समय लगने की वजह से सभी मरीजों के लिए उक्त सुविधा देने में अस्मर्थ रह जाते हैं। डिपार्टमेंट में स्टाफ की कमी होने की वजह से कार्य के दबाव के चलते एक्स-रे व सोनोग्राफी सेवा प्रभावित हो रही है।
मरीजों से पूरी फीस ले रहे निजी सेंटरों में एक्स-रे के लिए 4-5 सौ रुपए की शुरूआती फीस ली जाती है जबकि सरकारी फीस महज 80 रुपए से शुरू होती है। कीमत मुख्य रूप से फिल्म की होती है, लेकिन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फिल्म नहीं देने के बाद भी पूरी फीस ली जा रही है, मरीजों को किसी तरह की छूट नहीं दी जा रही है।
प्रिंटर के सुधार के लिए बुलाया गया है इंजीनियर ^मेडिकल कॉलेज अस्पताल के असिस्टेंट मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. रविकांत जाटवर के मुताबिक एक्स-रे का प्रिंटर खराब हो जाने की वजह से मरीजों को फिल्म नहीं मिल पा रही है, उन्हें ऑनलाइन रिपोर्ट उपलब्ध कराया जा रहा है। इमरजेंसी केस के लिए मेनुअल एक्स-रे रिपोर्ट दिया जाता है। प्रिंटर के सुधार के लिए इंजीनियर बुलाया गया है।




