कोरबा/पाली:- जिले के पाली विकासखण्ड अंतर्गत एवं बिलासपुर जिले की सीमा से लगे ग्राम शिवपुर के अधीन खसरा नंबर 541, बड़े झाड़ की और पट्टा प्राप्त जमीन पर बड़ा घोटाला का खेल चल रहा है, जहां करोड़ो की लागत से हो रहे निजी ग्रीन चुल बायो प्लांट प्रोजेक्ट के निर्माण में 6 एकड़ जमीन का पंचायत से एनओसी लेकर करीब 15 एकड़ पर कब्जा कर अवैध खनन, साथ ही पट्टे के भूमि की भी खरीद- फरोस्त का खेल बेरोकटोक चल रहा है। करीब ढाई दशक पूर्व वन विभाग ने जिस जमीन पर पौधारोपण का कार्य कराया था। मिलीभगत के इस खेल में प्लांट को बेजा लाभ पहुँचाने राजस्व अमले ने भूमि खसरा नंबर पर एक बड़ा हेरफेर किया है, जिस घोटाला मामले को जिला प्रशासन ने अबतक संज्ञान में नही लिया है।
सूत्रों के मुताबित ग्राम शिवपुर का अंतिम सीमा और बिलासपुर जिले की सीमा से लगे 541 खसरा नंबर वाले जमीन का स्थानीय कई किसानों को कृषि पट्टा प्राप्त है तथा जिस बड़े झाड़ की जमीन के कुछ हिस्से में वर्ष 2000 में वन विभाग द्वारा पौधारोपण का कार्य भी कराया गया था, जिस भूमि पर अवैध कब्जा कर और पट्टे की खरीद- फरोस्त कर ग्रीन चुल बायो प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करोड़ो के इस प्रोजेक्ट को लाभ पहुँचाने के लिए राजस्व अमले द्वारा 541 खसरा के रकबा नंबर पर बड़ा हेरफेर करते हुए कूटरचित दस्तावेज, किसान किताब व चौहद्दी तैयार करते हुए शासकीय भूमि को निजी बता दिया है। प्लांट निर्माण के शुरुआती कार्यकाल में जिस बड़े झाड़ के शासकीय भूमि पर लगे साजा, सराई सहित अन्य सैकड़ो पेड़ों को बेदर्दी से काटकर जमीदोज कर दिया गया। जानकारों का भी मानना है कि बायो प्लांट का निर्माण अवैध तौर- तरीके अपनाकर किया जा रहा है। जिसके लिए खसरा नंबर में छेड़छाड़ किया गया है और पट्टे के जमीन की खरीद- फरोस्त भी की गई है। इस प्लांट द्वारा काबिज भूमि से लगे कृषि भूमि स्वामियों ने इस बड़े झोलझाल की शिकायत राजस्व अधिकारियों व जिला प्रशासन से भी की है, लेकिन मामले में अबतक कोई कार्रवाई देखने को नही मिल पाया है। बता दें कि बड़े झाड़ के जंगल भूमि का रजिस्ट्री, सीमांकन, बटांकन का नियम नही है। वन संरक्षण अधिनियम 1080 की धारा 2 के तहत राजस्व दस्तावेजों में बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज जमीन का आवंटन को केंद्र शासन की अनुमति के बगैर राज्य शासन के अधिकारी नही कर सकते। उच्चतम न्यायालय ने भी इसमें याचिकाएं खारिज कर दी है। किंतु खसरा नंबर 541 शासकीय बड़े झाड़ की जमीन पर मिलीभगत के परिणामस्वरूप सब मुमकिन हो गया, जो एक बेहद ही गंभीर हेरफेर का मामला है। इस कूटरचित जमीन घोटाला के मामले पर शासन- प्रशासन द्वारा त्वरित संज्ञान लेकर निष्पक्ष और ईमानदाराना जांच की आवश्यकता है। यदि सही जांच हुई तो यकीनन मिलीभगत से शासकीय जमीन घोटाला का मामला उजागर होगा।




