कोरबा/पाली:- जिले के पाली हाईस्कूल में पदस्थ प्राचार्य मनोज सराफ पर अपने ही व्याख्याता के साथ मारपीट किये जाने का आरोप लगा है। मारपीट से आहत व्याख्याता ने घटना की लिखित शिकायत थाने में दी है, तो पीड़ित की वृद्धा मां प्राचार्य को हटाए जाने की मांग लेकर स्कूल मुख्य गेट में धरने पर बैठ गई है।
प्राचार्य द्वारा व्याख्याता से मारपीट किये जाने का यह मामला बीते 27 अप्रैल की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली में पदस्थ भौतिकी व्याख्याता प्रखर पांडेय के साथ प्राचार्य मनोज सराफ का विभागीय खींचतान बीते कुछ महीनों से चलता आ रहा है। घटना दिनांक को प्राचार्य सराफ ने व्याख्याता प्रखर पांडेय को अपने कक्ष में बुलाया और विभागीय मामले को लेकर कहासुनी होते- होते एकाएक मामला मारपीट में तब्दील हो गया। पीड़ित व्याख्याता ने बताया कि इस दौरान सराफ अपने हाथ मे चप्पल लेकर उन्हें मारने के लिए दौड़ाने लगे। व्याख्याता किसी तरह मौके से भागे, लेकिन प्राचार्य उन्हें स्कूल के बाहर मुख्य सड़क पर भी दौड़ाकर मारने लगे, भागते हुए वे किसी तरह स्कूल के समीप अपने घर पहुँचे। बीपी के मरीज होने की वजह से दौड़ने के कारण उनके नाक से खून बहने लगा और वे घर पर ही बेसुध होकर गिर पड़े। परिजन किसी तरह पीड़ित को समीप के अस्पताल लेकर पहुँचे, जहां समय पर उपचार शुरू होने से गंभीर हालात टल गई। व्याख्याता ने इस घटना को लेकर प्राचार्य के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत दी है, किन्तु घटनाक्रम से वे सदमे में है। उधर घटना को लेकर व्याख्याता की 65 वर्षीय वृद्धा मां श्रीमती सकुंतला पांडेय आज हाईस्कूल मुख्य गेट पर “मनोज सराफ हटाओ, मेरे बेटे को बचाओ” हाथ मे तख्ती लेकर धरने में बैठ गई है। उनकी मांग है कि प्राचार्य मनोज सराफ को पाली हाईस्कूल से अविलंब हटाया जाए, जब तक उन्हें न्याय नही मिल जाता वे रोजाना स्कूल समयावधि तक धरने पर बैठेगी।
प्राचार्य की मनमानी को बताया जा रहा वजह
प्राचार्य मनोज सराफ द्वारा व्याख्याता प्रखर पांडेय के साथ खींचतान व मारपीट जैसी नौबत की वजह प्राचार्य की मनमानी को बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार जी विज्ञान, रसायन व भौतिकी का प्रायोगिक सामाग्री से संबंधित 4 वर्ष का कोई एंट्री फिजिक्स स्टाक रजिस्टर में नही है, इसके अलावा भेजे गए प्रोजेक्टर में से कुछ गायब है। जिससे संबंध में भी कोई लेखा- जोखा नही है। भौतिकी व्याख्याता प्रखर पांडेय को इस मामले में फिजिक्स रजिस्टर पर फर्जी संधारण करने दबाव बनाया जा रहा था, व्याख्याता द्वारा उक्त कृत्य को लेकर मना किये जाने के परिणामस्वरूप इस विवाद की उपज होना बताया जा रहा है। फिलहाल मौजूदा घटना को लेकर सच्चाई क्या है यह तो प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।


